चमोली। नए साल की शुरुआत के साथ उत्तराखंड में बर्फबारी का इंतजार आखिरकार खत्म हो गया। चमोली जिले की भारत-चीन सीमा से सटी नीती घाटी में सीजन की पहली बर्फबारी हुई है। घाटी की ऊंची चोटियों और गांवों पर बर्फ की मोटी परत जमा हो गई, जिसकी मनमोहक तस्वीरें सोशल मीडिया और स्थानीय लोगों के जरिए सामने आई हैं। प्रकृति प्रेमी और पर्यटक लंबे समय से इस पल का इंतजार कर रहे थे, और अब उम्मीद जताई जा रही है कि राज्य के अन्य उच्च हिमालयी क्षेत्रों जैसे औली, बद्रीनाथ और हेमकुंड साहिब में भी जल्द बर्फबारी होगी।
नीती घाटी में 1 जनवरी से मौसम पूरी तरह बंद हो गया था। घने बादल छाए रहे और ठंड बढ़ने से पर्यटकों की उम्मीदें जगमगा उठीं। स्थानीय निवासियों द्वारा साझा की गई तस्वीरों और वीडियो में घाटी बर्फ से लकदक नजर आ रही है। यह बर्फबारी उन पर्यटकों के लिए राहत की खबर है जो उत्तराखंड पहुंचकर बर्फ का दीदार करने आए थे, लेकिन अब तक शुष्क मौसम से मायूस हो रहे थे।
हालांकि, बर्फबारी न होने से पहले पूरे राज्य में शुष्क मौसम का कहर देखने को मिल रहा था। जंगलों में आग लगने की घटनाएं बढ़ गई थीं, जबकि बारिश और बर्फ की कमी से किसानों की फसलें प्रभावित हो रही थीं। मैदानी इलाकों में पानी की कमी और पहाड़ों में सूखे की स्थिति ने चिंता बढ़ा दी थी। इसके अलावा, बर्फबारी न होने से जंगली जानवर जैसे भालू और तेंदुआ रिहायशी इलाकों में उतर आए थे, जिससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल था।
पर्यटन के लिहाज से भी यह देरी नुकसानदेह साबित हो रही थी। औली और चॉपटा जैसे प्रसिद्ध स्थल सूने पड़े थे, जहां आमतौर पर दिसंबर-जनवरी में बर्फबारी से पर्यटकों की भीड़ लगी रहती है। चमोली के पर्यटन व्यवसायी निराश थे, क्योंकि हर साल इस समय विदेशी और घरेलू सैलानी बर्फ का मजा लेने पहुंचते हैं।
अब नीती घाटी में हुई इस पहली बर्फबारी से माहौल बदल गया है। पर्यटकों के चेहरे खिल उठे हैं और अन्य क्षेत्रों में भी बर्फ गिरने के आसार बन रहे हैं। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से आने वाले दिनों में उच्च क्षेत्रों में और बर्फबारी हो सकती है। हालांकि, अभी ठंड कम महसूस की जा रही है, लेकिन अगर बर्फबारी जारी रही तो कड़ाके की सर्दी लौट आएगी।
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