Monday , 13 July 2026
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‘भीष्म’ थिंक टैंक का शुभारंभ, राज्यपाल और सीडीएस अनिल चौहान ने की शुरुआत

देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक चिंतन के क्षेत्र में एक नया अध्याय शुरू हो गया है। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने लोक भवन में ‘भारत हिमालयन इंटरनेशनल स्ट्रैटेजिक मंच (भीष्म)’ का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने भीष्म का लोगो और आधिकारिक वेबसाइट का भी अनावरण किया।

भीष्म एक स्वतंत्र रणनीतिक थिंक टैंक है, जो देहरादून के बौद्धिक संसाधनों को एकत्रित कर उत्तराखंड को देश का प्रमुख रणनीतिक चिंतन केंद्र बनाने का लक्ष्य रखता है। राज्यपाल ने कहा कि देहरादून में भीष्म की स्थापना उत्तराखंड और पूरे राष्ट्र के लिए गौरव की बात है। यह मंच राष्ट्रीय सुरक्षा, हिमालयी सीमाओं और सामरिक मुद्दों पर गहन अध्ययन और नीति सुझाव देगा।

शुभारंभ समारोह में मुख्य अतिथि चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने “फ्रंटियर्स, बॉर्डर्स एंड एलएसी: द मिडिल सेक्टर” विषय पर महत्वपूर्ण व्याख्यान दिया। उन्होंने मध्य सेक्टर (उत्तराखंड-हिमाचल क्षेत्र) में हिमालयी सीमाओं के बढ़ते सामरिक महत्व पर जोर दिया और सरकार द्वारा सीमा क्षेत्रों में अवसंरचना विकास पर दिए जा रहे विशेष ध्यान की सराहना की।

जनरल अनिल चौहान ने भारत-चीन संबंधों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 1954 में पंचशील समझौते के समय भारत ने तिब्बत को चीन का हिस्सा मान लिया था। भारत को लगा था कि इससे उत्तरी सीमा का विवाद काफी हद तक सुलझ जाएगा, लेकिन चीन ने इसे केवल व्यापार और संबंध सुधार से जुड़ा समझौता माना। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत पड़ोसी चीन के साथ सकारात्मक संबंध चाहता था और पंचशील उसी नीति का हिस्सा था।

सीडीएस ने आगे बताया कि आजादी के बाद ब्रिटिश शासन समाप्त होने पर भारत को अपनी सीमाओं की परिभाषा खुद तय करनी पड़ी। जवाहरलाल नेहरू को मैकमोहन रेखा और लद्दाख में भारत के दावों का आभास था, लेकिन कई इलाकों में स्थिति अस्पष्ट थी। नेहरू सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थिरता चाहते थे, जबकि चीन तिब्बत में अपनी स्थिति मजबूत करने के बाद संतुलन चाहता था।

भीष्म थिंक टैंक की संस्थापक टीम में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान के अलावा लेफ्टिनेंट जनरल अजय कुमार सिंह (सेवानिवृत्त), कर्नल (डॉ.) गिरिजा शंकर मुंगली (सेवानिवृत्त), संजीव चोपड़ा (आईएएस, सेवानिवृत्त), प्रो. दुर्गेश पंत, प्रो. दीवान सिंह रावत, प्रो. सुरेखा डंगवाल, नितिन गोखले और राजन आर्य जैसे अनुभवी विशेषज्ञ शामिल हैं।

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