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चकराता विधानसभा 2027: राम शरण नौटियाल की मजबूत दावेदारी, प्रीतम सिंह और बॉबी पंवार की चुनौतियां

देहरादून : उत्तराखंड की चकराता विधानसभा सीट, जो अनुसूचित जनजाति (ST) आरक्षित है और मुख्य रूप से जौनसारी जनजाति बहुल क्षेत्र है, हालंकि, अभी चुनाव में वक्त है, लेकिन 2027 विधानसभा चुनावों में इस सीट का राजनीतिक हॉटस्पॉट बनना तय है। इस सीट पर भाजपा (BJP) के राम शरण नौटियाल की दावेदारी मजबूत नजर आ रही है, जबकि कांग्रेस (INC) के वर्तमान विधायक प्रीतम सिंह की लंबी विरासत है। वहीं, युवा एक्टिविस्ट बॉबी पंवार का उभरता फैक्टर भी चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।

राम शरण नौटियाल: स्थानीय जड़ों और डबल इंजन विकास का चेहरा

राम शरण नौटियाल, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष और प्रसिद्ध गायक जुबिन नौटियाल के पिता, चकराता के स्थानीय राजनीति में एक जाना-माना नाम हैं। 2022 चुनाव में उन्होंने BJP के टिकट पर 27,417 वोट (37.67%) हासिल किए, जो INC के प्रीतम सिंह के 36,853 वोट (50.64%) से 9,436 वोटों से पीछे थे। नौटियाल की ताकत उनकी बेदाग छवि और ग्रामीण विकास के अनुभव है। उन्होंने जिला पंचायत अध्यक्ष रहते हुए कई काम कराए।

BJP की “डबल इंजन” सरकार (केंद्र में मोदी और राज्य में धामी) नौटियाल के लिए बड़ा प्लस पॉइंट है। केंद्र की योजनाएं जैसे PMGSY (सड़कें), जल जीवन मिशन (पेयजल) और आयुष्मान भारत (स्वास्थ्य) चकराता में क्रियान्वित हो रही हैं, जो पलायन रोकने में मददगार साबित हो सकती हैं। ईमानदार छवि और स्थानीय मुद्दों पर फोकस उन्हें बेहतर विकल्प बनाता है।

प्रीतम सिंह: लंबी विरासत लेकिन विकास में स्टाग्नेशन

प्रीतम सिंह, INC नेता, चकराता से छह बार MLA रह चुके हैं और पूर्व नेता विपक्ष व मिनिस्टर भी रहे हैं। उनका राजनीतिक सफर 1988 से शुरू हुआ, और उन्होंने ST समुदाय के लिए आरक्षण जैसे मुद्दों पर काम किया। 2022 में उन्होंने 50.64% वोटों से जीत हासिल की, जो उनकी मजबूत पकड़ दिखाती है। हालांकि, आलोचक कहते हैं कि लंबे शासन में विकास रुका हुआ है। पलायन जारी है, युवा बेरोजगार हैं और स्वास्थ्य-शिक्षा सुविधाएं अपर्याप्त हैं। 2027 में, INC की कमजोर संगठनात्मक स्थिति और राष्ट्रीय स्तर पर चुनौतियां उनकी मुश्किलें बढ़ा सकती हैं।

बॉबी पंवार फैक्टर: युवा अपील लेकिन स्प्लिट वोट का खतरा

बॉबी पंवार, एक्टिविस्ट और स्वाभिमान मोर्चा के अध्यक्ष, चकराता की राजनीति में नया फैक्टर हैं। लाखामंडल (चकराता तहसील) से आने वाले पंवार ने उत्तराखंड बेरोजगार संघ से शुरुआत की और पेपर लीक प्रोटेस्ट्स का चेहरा बने। 2024 लोकसभा चुनाव में टिहरी सीट से इंडिपेंडेंट उम्मीदवार के रूप में उन्होंने 1.6 लाख वोट हासिल किए, जो कांग्रेस से भी ज्यादा थे। पंवार की ताकत युवा बेरोजगारों में है, जो पलायन और सरकारी नौकरियों पर फोकस करते हैं। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या जनता बॉबी पंवार को वास्तव में एक विकल्प मानती है? क्या उनके पास इतना समर्थन है?

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