Friday , 23 October 2026
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दलेर मेहंदी विवाद: 35 लाख रुपये की फीस से लेकर कलाकार के सम्मान तक छिड़ी बहस, मीका सिंह ने सुबोध उनियाल में मांगी भुगतान की रसीद

  • कुंजापुरी मेले में प्रस्तुति के दौरान मंत्री सुबोध उनियाल ने जताई थी नाराजगी।
  • मीका सिंह ने भुगतान की रसीदें सार्वजनिक करने की उठाई मांग।

देहरादून। उत्तराखंड के नरेंद्रनगर में आयोजित कुंजापुरी मेले में मशहूर पंजाबी गायक दलेर मेहंदी की प्रस्तुति को लेकर शुरू हुआ विवाद अब कलाकारों के सम्मान, कार्यक्रम की फीस और सार्वजनिक मंच पर जनप्रतिनिधियों के व्यवहार तक पहुंच गया है। कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के वन मंत्री एवं स्थानीय विधायक सुबोध उनियाल द्वारा दलेर मेहंदी को मंच पर टोके जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद संगीत और फिल्म जगत की कई हस्तियों ने नाराजगी जताई है। वहीं, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले में हस्तक्षेप करते हुए विवाद को समाप्त करने की अपील की है।

विवाद की शुरुआत कुंजापुरी मेले में दलेर मेहंदी की प्रस्तुति के दौरान हुई। मंत्री सुबोध उनियाल ने गायक की आवाज और प्रस्तुति के तरीके पर सवाल उठाते हुए नाराजगी जाहिर की। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्यक्रम के लिए 30 लाख रुपये से अधिक, जबकि बाद में अपने बयान में 35 लाख रुपये फीस दिए जाने की बात कही गई, लेकिन गायक अपेक्षा के अनुरूप प्रस्तुति नहीं दे पाए। मंत्री ने यह भी संदेह जताया कि गायक लाइव गाने के बजाय लिप-सिंक कर रहे थे।

मंच पर टोकने के तरीके पर उठे सवाल

घटना का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इस बात को लेकर बहस शुरू हो गई कि किसी कलाकार की प्रस्तुति से असंतुष्ट होने पर सार्वजनिक मंच पर इस तरह प्रतिक्रिया देना कितना उचित है। कई लोगों ने इसे वरिष्ठ कलाकार का अपमान बताया, जबकि मंत्री के समर्थकों का तर्क रहा कि कार्यक्रम में जनता के पैसे खर्च होने की स्थिति में प्रस्तुति की गुणवत्ता पर सवाल उठाना गलत नहीं है।

मंत्री सुबोध उनियाल ने सफाई देते हुए कहा कि कार्यक्रम के दौरान उन्हें लगा कि दलेर मेहंदी नशे में हैं। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि गायक की तबीयत खराब है। बाद में उन्हें उनकी स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के बारे में बताया गया। मंत्री के मुताबिक, वह किसी बड़े कलाकार का मौके पर मेडिकल परीक्षण नहीं करा सकते थे।

उनियाल ने कहा कि यदि दलेर मेहंदी की तबीयत ठीक नहीं थी, तो उन्हें आयोजकों को इसकी जानकारी देनी चाहिए थी या कार्यक्रम में प्रस्तुति देने से बचना चाहिए था। उन्होंने दावा किया कि गायक करीब 45 मिनट तक अपेक्षा के अनुरूप प्रस्तुति नहीं दे पाए। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य कलाकार का अपमान करना नहीं था, बल्कि जनप्रतिनिधि होने के नाते उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया दी।

मीका सिंह ने मांगी माफी, फीस का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग

विवाद बढ़ने के बाद दलेर मेहंदी के छोटे भाई और मशहूर गायक मीका सिंह उनके समर्थन में सामने आए। मीका ने अपने भाई के साथ हुए व्यवहार पर आपत्ति जताते हुए संबंधित लोगों से माफी मांगने की मांग की। उन्होंने कहा कि किसी कलाकार के साथ सार्वजनिक मंच पर सम्मानजनक व्यवहार किया जाना चाहिए।

मीका सिंह ने मंत्री सुबोध उनियाल के 35 लाख रुपये फीस दिए जाने संबंधी बयान पर भी सवाल उठाए। उन्होंने भुगतान की रसीदें सार्वजनिक करने की मांग करते हुए पूछा कि यह राशि नकद दी गई थी या चेक के माध्यम से भुगतान किया गया था। मीका का कहना था कि भुगतान से जुड़े दस्तावेज सामने आने से मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

मीका ने यह भी संकेत दिया कि दलेर मेहंदी की तबीयत ठीक नहीं थी और उनकी सर्जरी हुई थी। उन्होंने अपने भाई के शराब पीने संबंधी आरोपों को भी गलत बताया।

कपिल शर्मा और अनुपम खेर समेत कई हस्तियां समर्थन में आईं

दलेर मेहंदी के समर्थन में फिल्म और संगीत जगत की कई हस्तियों ने अपनी प्रतिक्रियाएं दीं। कॉमेडियन और अभिनेता कपिल शर्मा ने कहा कि दलेर मेहंदी की सर्जरी हुई थी, जिसके बारे में सभी लोगों को जानकारी नहीं थी। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी व्यक्ति की परिस्थितियों को समझे बिना उसके बारे में राय बनाने से बचना चाहिए।

अभिनेता अनुपम खेर ने भी इस घटना पर निराशा जताते हुए कहा कि संगीत जगत में दशकों तक योगदान देने वाले कलाकार के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार किया जाना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि किसी कलाकार की प्रस्तुति पर असहमति होने पर उसे सबके सामने इस तरह टोकना जरूरी था या नहीं।

अभिनेत्री और गायिका इला अरुण ने भी दलेर मेहंदी के प्रति समर्थन जताया। उन्होंने कहा कि दलेर मेहंदी का पंजाबी और सूफी संगीत को लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनके मुताबिक, घटना के सभी पहलुओं की जानकारी न होने के बावजूद कलाकार के साथ किए गए व्यवहार और उन पर लगाए गए आरोपों को लेकर चिंता है।

वहीं, गायिका सोना महापात्रा ने इस बहस के दूसरे पहलू की ओर ध्यान दिलाते हुए सवाल किया कि वरिष्ठ कलाकारों के सम्मान का अर्थ उनके पेशेवर काम के प्रति जवाबदेही से समझौता करना नहीं होना चाहिए।

मुख्यमंत्री धामी ने की विवाद समाप्त करने की अपील

मामले के राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तूल पकड़ने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विवाद को खत्म करने की अपील की। उन्होंने कहा कि मंत्री सुबोध उनियाल अपना पक्ष स्पष्ट कर चुके हैं और उनका किसी को ठेस पहुंचाने का इरादा नहीं था। मुख्यमंत्री के अनुसार, उस समय मंत्री को दलेर मेहंदी की खराब तबीयत के बारे में जानकारी नहीं थी।

धामी ने कहा कि उत्तराखंड की पहचान लेखकों, कलाकारों और विद्वानों का सम्मान करने वाली भूमि के रूप में रही है। ऐसे में विवाद को आगे बढ़ाने के बजाय मामले को समझदारी से समाप्त किया जाना चाहिए।

पुराना इंटरव्यू भी चर्चा में

इस विवाद के बीच दलेर मेहंदी का एक पुराना इंटरव्यू भी सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया। इसमें उन्होंने बताया था कि संगीत की शिक्षा देने वाले उनके गुरु उस्ताद राहत अली खान ने उनसे दो शर्तें रखी थीं। पहली, वह शराब नहीं पिएंगे और दूसरी, अपने बाल नहीं कटवाएंगे। दलेर मेहंदी के अनुसार, उनकी मां ने भी उन्हें नशे से दूर रहने की सलाह दी थी। उन्होंने दावा किया था कि उन्होंने अपने गुरु और मां से किए वादे को हमेशा निभाया।

कलाकार के सम्मान और जवाबदेही पर बहस

कुंजापुरी मेले में हुई इस घटना ने एक बार फिर सार्वजनिक कार्यक्रमों में कलाकारों के सम्मान, आयोजकों की जिम्मेदारी और प्रस्तुति की गुणवत्ता को लेकर बहस छेड़ दी है। एक पक्ष का मानना है कि किसी कलाकार की प्रस्तुति अपेक्षा के अनुरूप न होने पर सवाल उठाना उचित है, लेकिन इसके लिए गरिमापूर्ण तरीका अपनाया जाना चाहिए।

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