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हाई कोर्ट का RBI को आदेश: जब्त की गई ₹14.15 लाख की पुरानी करेंसी बदलें

चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को निर्देश दिया है कि वह एक याचिकाकर्ता की 14.15 लाख रुपये की पुरानी करेंसी (विमुद्रित नोट) को चार सप्ताह के भीतर वैध नए नोटों में बदले। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि सरकारी एजेंसियां किसी राशि की वैधता की पुष्टि कर देती हैं, तो उसे केवल “पुरानी करेंसी” होने के आधार पर रद्दी नहीं माना जा सकता।

मुख्य बिंदु और कोर्ट की टिप्पणी

  • वैधता सर्वोपरि: जस्टिस विकास बहल की पीठ ने कहा कि जब जांच एजेंसियों और आयकर विभाग ने जांच के बाद राशि को वैध (Legitimate) मानकर याचिकाकर्ता को लौटा दिया है, तो RBI इसे बदलने से इनकार नहीं कर सकता।

  • अधिकारों का संरक्षण: कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि नागरिकों को उनकी वैध संपत्ति से केवल तकनीकी आधार पर वंचित नहीं किया जा सकता, खासकर तब जब देरी का कारण अदालती कार्यवाही या जब्ती रही हो।

  • समय सीमा: कोर्ट ने इस पूरी प्रक्रिया को पूरा करने और नई करेंसी जारी करने के लिए RBI को 4 सप्ताह का समय दिया है।

मामला क्या था?

यह मामला एक व्यक्ति से जुड़ी नकदी की जब्ती का था। नोटबंदी (2016) के दौरान या उससे पहले पुलिस या अन्य एजेंसियों द्वारा यह राशि जब्त की गई थी। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद जब ट्रायल कोर्ट या जांच एजेंसियों ने उस पैसे को “क्लीन चिट” दी और याचिकाकर्ता को वापस लौटाया, तब तक पुराने नोट (500 और 1000 रुपये) चलन से बाहर हो चुके थे।

जब याचिकाकर्ता ने इसे बदलने के लिए RBI का दरवाजा खटखटाया, तो नियमों का हवाला देकर इसे बदलने से मना कर दिया गया था, जिसके बाद मामला हाई कोर्ट पहुँचा।

इस फैसले का महत्व

यह फैसला उन सभी लंबित मामलों के लिए एक नजीर (Precedent) बनेगा जहाँ लोगों की नकदी पुलिस केस या अदालती जब्ती के कारण नोटबंदी की समय-सीमा के भीतर नहीं बदली जा सकी थी।

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