Wednesday , 4 March 2026
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अस्पताल का दर्जा बढ़ा, सुविधाएं नहीं: सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मोरी की बदहाल एंबुलेंस

मोरी (उत्तरकाशी)। उत्तरकाशी जिले के दूरस्थ इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति बदहाल है। मोरी का सरकारी अस्पताल, जिसे हाल ही में उपजिला चिकित्सालय का दर्जा दिया गया है, आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल का दर्जा तो बढ़ा दिया गया, लेकिन जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं में कोई खास सुधार नहीं हुआ है।

उपजिला अस्पताल बना, लेकिन हालात पुराने

मोरी का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) और फिर उपजिला चिकित्सालय के रूप में अपग्रेड किया गया। सरकार की ओर से विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद स्वीकृत किए गए और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के दावे भी किए गए। लेकिन वह केवल हवाई साबित हुए।

लेकिन, स्थानीय लोगों के अनुसार अस्पताल में अभी भी डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ, दवाइयों और आधुनिक उपकरणों की भारी कमी बनी हुई है। कई बार मरीजों को सामान्य जांच और उपचार के लिए भी इंतजार करना पड़ता है।

यह होनी चाहिए सुविधाएं

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा दिया गया है। अस्पताल के संचालन के लिए 37 पदों (25 अस्थायी व 12 आउटसोर्स) की स्वीकृति दी गई है। स्वीकृत पदों में चिकित्सा अधीक्षक, पब्लिक हेल्थ स्पेशलिस्ट, जनरल सर्जन, फिजिशियन, स्त्री रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ, निश्चेतक, दंत शल्यक, नर्सिंग अधिकारी, लैब टेक्नीशियन आदि मुख्य रूप से शामिल हैं।

एंबुलेंस सेवा सबसे बड़ी चिंता

अस्पताल की एंबुलेंस व्यवस्था भी गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। एक मात्र उपलब्ध एंबुलेंस पुरानी और खराब हालत में है। ऐसे में अगर किसी गंभीर मरीज को जिला अस्पताल उत्तरकाशी या एम्स ऋषिकेश रेफर करना पड़े, तो समय पर परिवहन की व्यवस्था नहीं हो पाती। इससे मरीजों की जान जोखिम में पड़ जाती है। आलम यह है कि एंबुलेंस की खिड़की पर शीशा तक नहीं है। यह भरोसा नहीं है कि अगर एंबुलेंस लेकर जाएंगे तो वह गंतव्य तक पहुंच भी पाएगी या नहीं?

चुनावी वादों पर उठे सवाल

स्थानीय निवासियों का कहना है कि चुनाव के समय नेता क्षेत्र में आकर स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद वे वादे सिर्फ कागजों और सोशल मीडिया तक ही सीमित रह जाते हैं।

क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यहां मरीज को इलाज से ज्यादा इंतजार करना पड़ता है। अगर कोई इमरजेंसी हो जाए तो हालात और भी खराब हो जाते हैं। उनका कहना है कि सिर्फ अस्पताल का नाम बदल देने से काम नहीं चलेगा, सुविधाएं भी बढ़ानी होंगी।

जनता की मांग: मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था

मोरी क्षेत्र के लोगों ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग से अस्पताल की व्यवस्था में तत्काल सुधार की मांग की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल में—

  • पर्याप्त संख्या में डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती
  • आधुनिक चिकित्सा उपकरण और दवाइयों की उपलब्धता।
  • बेहतर एंबुलेंस और आपातकालीन सेवाएं।
  • नियमित निरीक्षण और स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी जैसे कदम उठाए जाने जरूरी हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मामला केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि लोगों की जिंदगी और सुरक्षा से जुड़ा सवाल है। ऐसे में प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को जल्द ही मोरी उपजिला अस्पताल की वास्तविक स्थिति का जायजा लेकर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने होंगे।

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