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इस्लामाबाद में ईरान-अमेरिका वार्ता: मध्य-पूर्व संघर्ष खत्म करने की कोशिश

नई दिल्ली: मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। ईरानी संसद के स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf के नेतृत्व में एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार देर रात Islamabad पहुंचा। यहां ईरान और United States के बीच अहम वार्ता प्रस्तावित है, जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय संघर्ष को समाप्त करना और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर पड़े असर को कम करना है।

मौजूदा संघर्ष के बीच फिलहाल दो सप्ताह का संघर्ष-विराम लागू है। हालांकि, इस दौरान भी हजारों लोगों की जान जा चुकी है और वैश्विक ऊर्जा बाजार बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। तेल आपूर्ति का एक प्रमुख मार्ग बाधित होने से कई देशों की अर्थव्यवस्था पर असर देखा जा रहा है।जहां एक ओर ईरान और अमेरिका ने सीधे हमलों पर विराम लगाया है, वहीं Israel द्वारा Lebanon में सैन्य कार्रवाई जारी है। ऐसे में इस्लामाबाद में होने वाली यह बैठक बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

कब और कहां होगी वार्ता

Shehbaz Sharif के निमंत्रण पर यह बैठक इस्लामाबाद में आयोजित हो रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बातचीत शनिवार सुबह (पाकिस्तान समयानुसार) शुरू हो सकती है। हालांकि आधिकारिक स्थल की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसके Serena Hotel Islamabad में होने की संभावना जताई जा रही है।

कौन-कौन होगा शामिल

अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति J. D. Vance करेंगे। उनके साथ विशेष दूत Steve Witkoff और Jared Kushner भी शामिल होंगे।
ईरान की ओर से विदेश मंत्री Abbas Araghchi और अन्य वरिष्ठ अधिकारी पहले ही इस्लामाबाद पहुंच चुके हैं।

एजेंडा क्या है

वार्ता का मुख्य केंद्र अमेरिका का 15-सूत्रीय प्रस्ताव और ईरान का 10-सूत्रीय जवाबी प्रस्ताव होगा।

  • अमेरिका की मांग: ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम भंडार को सौंपे और Strait of Hormuz को फिर से खोले।
  • ईरान की मांग: होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण बनाए रखना, जहाजों पर टोल वसूली, क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाइयों का अंत और सभी प्रतिबंधों को हटाना।

लेबनान में जारी संघर्ष पर औपचारिक चर्चा होगी या नहीं, इस पर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।

पाकिस्तान की मध्यस्थता क्यों

पाकिस्तान के ईरान और अमेरिका दोनों के साथ मजबूत संबंध हैं। ईरान ने 1947 में पाकिस्तान को सबसे पहले मान्यता दी थी और दोनों देशों के बीच लगभग 900 किलोमीटर लंबी सीमा साझा होती है।
साथ ही, पाकिस्तान को 2004 से अमेरिका का ‘प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी’ का दर्जा प्राप्त है।

सुरक्षा और तैयारी

उच्च-स्तरीय वार्ता को देखते हुए इस्लामाबाद में दो दिन की सार्वजनिक छुट्टी घोषित की गई है। शहर में कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं—अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती, यातायात में बदलाव और प्रमुख स्थानों पर पुलिस चौकियां स्थापित की गई हैं।

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