Tuesday , 18 August 2026
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उमर खालिद फैसला : UAPA मामलों में भी जमानत नियम, जेल अपवाद-सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी Unlawful Activities (Prevention) Act (UAPA) से जुड़े मामलों में अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि जमानत को नियम और जेल को अपवाद माना जाना चाहिए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी आरोपी को केवल इसलिए लंबे समय तक जेल में नहीं रखा जा सकता क्योंकि उसके खिलाफ यूएपीए के तहत मामला दर्ज है।

जस्टिस B. V. Nagarathna और जस्टिस Ujjal Bhuyan की पीठ ने यह टिप्पणी जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के हंदवाड़ा निवासी सैयद इफ्तिखार अंद्राबी को जमानत देते हुए की। अंद्राबी जून 2020 से नार्को-आतंकवाद से जुड़े एक मामले में जेल में बंद था, जिसकी जांच National Investigation Agency (NIA) कर रही है।

पीठ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 और 22 के तहत प्रत्येक व्यक्ति को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार प्राप्त है। ऐसे में किसी आरोपी के त्वरित सुनवाई के अधिकार को केवल यूएपीए जैसे कठोर कानून का हवाला देकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली दंगा मामलों से जुड़े ‘गुलफिशा फातिमा बनाम राज्य’ मामले के फैसले पर भी असहमति जताई। इसी मामले में कार्यकर्ता Umar Khalid और Sharjeel Imam को जमानत देने से इनकार किया गया था, जबकि अन्य कई आरोपियों को राहत मिली थी।

फैसला सुनाते हुए जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने कहा कि ‘नजीब मामले’ की व्याख्या बेहद सीमित तरीके से करना उचित नहीं है। अदालत ने कहा कि यदि मुकदमे में अत्यधिक देरी हो रही हो और आरोपी लंबे समय से जेल में बंद हो, तो उसे अनिश्चितकाल तक हिरासत में नहीं रखा जा सकता।

पीठ ने कहा कि यूएपीए की धारा 43D(5) के तहत जमानत पर लगी कानूनी रोक को भी संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों के दायरे में ही देखा जाना चाहिए। अदालत ने साफ किया कि परिस्थितियों के अनुसार जमानत से इनकार किया जा सकता है, लेकिन सामान्य सिद्धांत यही रहेगा कि जमानत नियम है और जेल अपवाद।

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