नई दिल्ली/कोलकाता/चेन्नई। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में गुरुवार को हुए विधानसभा चुनावों में आज़ादी के बाद रिकॉर्ड मतदान दर्ज किया गया। दोनों राज्यों में मतदाताओं की भारी भागीदारी के साथ इस बार लोकतंत्र का नया रिकॉर्ड बना। पश्चिम बंगाल में जहां पहले चरण की 152 सीटों पर 92.54 प्रतिशत मतदान हुआ, वहीं तमिलनाडु की सभी 234 सीटों पर 84.69 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई।
बंगाल में रिकॉर्ड मतदान, हिंसा में गिरावट
पश्चिम बंगाल में इस बार मतदान को ऐतिहासिक माना जा रहा है। चुनाव आयोग के अनुसार, पहले चरण में 16 जिलों की 152 सीटों पर मतदान शांतिपूर्ण रहा। पिछले चुनावों की तुलना में इस बार मतदान प्रतिशत में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। 2021 के पहले चरण में जहां 81.16 प्रतिशत मतदान हुआ था, वहीं इस बार यह आंकड़ा 92 प्रतिशत से अधिक पहुंच गया।
कोलकाता ब्यूरो के अनुसार, लंबे समय से चुनावी हिंसा के लिए चर्चा में रहने वाले बंगाल में इस बार अपेक्षाकृत शांत माहौल देखने को मिला। कुछ छिटपुट घटनाओं को छोड़कर बड़े पैमाने पर कोई अप्रिय घटना दर्ज नहीं की गई।
महिलाओं और प्रवासी मतदाताओं की बड़ी भागीदारी
इस बार मतदान में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। इसके अलावा विभिन्न राज्यों से लौटे प्रवासी श्रमिकों ने भी बड़ी संख्या में मतदान किया। कई मतदान केंद्रों पर शाम छह बजे के बाद भी लंबी कतारें लगी रहीं, जिसके चलते अंतिम आंकड़े और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतदान
चुनाव आयोग ने इस बार अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था की थी। पहले चरण में केंद्रीय बलों की 2407 कंपनियां, 2193 क्विक रिस्पांस टीमें और लगभग 40,000 पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे। भारी गर्मी और 40 डिग्री तक पहुंचे तापमान के बावजूद मतदाताओं ने उत्साहपूर्वक मतदान किया।
छिटपुट घटनाएं और हिंसा की खबरें
हालांकि मतदान शांतिपूर्ण रहा, लेकिन कुछ इलाकों में हिंसा की घटनाएं सामने आईं। सिलीगुड़ी में एक भाजपा प्रत्याशी पर भीड़ द्वारा हमला किए जाने की सूचना मिली। बीरभूम जिले में केंद्रीय बलों पर पथराव हुआ, जिसमें छह जवान घायल हो गए। दक्षिण दिनाजपुर, मालदा और मुर्शिदाबाद के कुछ क्षेत्रों में भी झड़प और हमले की घटनाएं दर्ज की गईं। कुल मिलाकर चार लोगों की मौत की भी जानकारी सामने आई।
तमिलनाडु में भी ऐतिहासिक वोटिंग
तमिलनाडु में 5.73 करोड़ मतदाताओं में से 84.69 प्रतिशत ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया, जो राज्य के इतिहास में उच्चतम मतदान में से एक है। करूर जिला 91.86 प्रतिशत मतदान के साथ सबसे आगे रहा, जबकि चेन्नई में 83.09 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई।
कोयंबटूर, मदुरै और तिरुचिरापल्ली जैसे जिलों में भी मतदान प्रतिशत 80 से 85 प्रतिशत के बीच रहा। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन सहित कई प्रमुख नेताओं की राजनीतिक किस्मत ईवीएम में बंद हो गई।
रिकॉर्ड मतदान का राजनीतिक संकेत
चुनावी विश्लेषकों के अनुसार, इस बार मतदान में बढ़ोतरी के पीछे मतदाता सूची को लेकर जागरूकता, सुरक्षा व्यवस्था और राजनीतिक प्रतिस्पर्धा प्रमुख कारण रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि एसआईआर प्रक्रिया के बाद मतदाताओं में मतदान को लेकर अधिक सक्रियता देखी गई।
बंगाल का ऐतिहासिक ट्रेंड
पश्चिम बंगाल के चुनावी इतिहास में उच्च मतदान अक्सर सत्ता परिवर्तन से जुड़ा रहा है। 1967, 1977 और 2011 के चुनावों में रिकॉर्ड मतदान के बाद राज्य में सत्ता परिवर्तन देखने को मिला था।
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