देहरादून : उत्तराखंड के पूर्व कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत ने धामी सरकार पर मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष के दुरुपयोग का सनसनीखेज आरोप लगाया है। उन्होंने इसे सैकड़ों करोड़ रुपये का घोटाला बताते हुए कहा कि कोष की बंदरबांट हो रही है और राजनीतिक लाभ के लिए इसका गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। हरक सिंह ने दावा किया कि जरूरतमंदों की बजाय भाजपा कार्यकर्ताओं और उनके परिजनों को व्यक्तिगत लाभ दिए जा रहे हैं।
हरक सिंह रावत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर ये आरोप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से उधम सिंह नगर और चंपावत जिलों का जिक्र किया, जहां से सूचना मांगी गई थी। इन दस्तावेजों से पता चला कि दोनों जिलों में भाजपा पदाधिकारियों और उनके परिवार के सदस्यों को हर साल कोष से आर्थिक सहायता दी जा रही है। उन्होंने कहा, “सूचना देने में देरी की गई और आधी-अधूरी जानकारी दी गई, लेकिन जो मिली, वह चौंकाने वाली है। ये मुख्यमंत्री से जुड़े जिले हैं, जहां जनता के पैसे का दुरुपयोग स्पष्ट है।”
कांग्रेस नेता ने कई नामों का उल्लेख करते हुए कहा कि अगर पूरे प्रदेश के 13 जिलों के आंकड़े सामने आ गए तो यह उत्तराखंड के इतिहास का सबसे बड़ा भ्रष्टाचार साबित होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि कोष का इस्तेमाल सुव्यवस्थित तरीके से राजनीतिक फायदे के लिए किया जा रहा है, न कि जनकल्याण के लिए। हरक सिंह ने मांग की कि मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए ताकि सच्चाई उजागर हो सके। उन्होंने बताया कि अन्य जिलों में भी आरटीआई दाखिल की जा रही है, लेकिन सूचना उपलब्ध कराने में जानबूझकर देरी की जा रही है।
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