Tuesday , 22 September 2026
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उत्तराखंड : 234 प्रवक्ताओं की AIIMS कर रहा जांच, नौकरी पर मंडराया ख़तरा

देहरादून: उत्तराखंड शिक्षा विभाग ने राज्य गठन के बाद दिव्यांग आरक्षण कोटे से नियुक्त सभी 234 प्रवक्ताओं की दिव्यांगता की जांच शुरू करने का फैसला किया है। यह जांच अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश के विशेष मेडिकल बोर्ड द्वारा की जाएगी, जिसकी शुरुआत रविवार 7 मार्च 2026 से हो रही है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती ने सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी कर कहा है कि राज्य गठन के बाद से अब तक दिव्यांग कोटे में भर्ती हुए प्रवक्ता संवर्ग के हर शिक्षक का स्वास्थ्य परीक्षण अनिवार्य रूप से कराया जाएगा।

जांच सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक एम्स ऋषिकेश में होगी। पहले चरण में 7 मार्च को 50 प्रवक्ताओं की जांच होगी, जबकि शेष शिक्षकों की जांच 12 मार्च, 14 मार्च, 28 मार्च और 2 अप्रैल 2026 को क्रमवार पूरी की जाएगी। शिक्षा विभाग ने सभी 13 जिलों, देहरादून, नैनीताल, पौड़ी, हरिद्वार, टिहरी, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़, बागेश्वर, चमोली, चंपावत से दिव्यांग कोटे में नियुक्त प्रवक्ताओं की सूची तैयार कर मुख्य शिक्षा अधिकारियों को भेज दी है। इन शिक्षकों को अपनी निर्धारित तारीख पर एम्स पहुंचना होगा, अन्यथा उनके खिलाफ एकतरफा विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

यह पूरा मामला तब सुर्खियों में आया जब नेशनल फेडरेशन ऑफ द ब्लाइंड (उत्तराखंड) ने उत्तराखंड हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की। याचिका में आरोप लगाया गया कि कई अपात्र लोग फर्जी दिव्यांगता प्रमाणपत्र, खासकर दृष्टिबाधित श्रेणी में बनवाकर दिव्यांग कोटे का लाभ उठाकर सरकारी नौकरी हासिल कर रहे हैं, जिससे वास्तविक दिव्यांग अभ्यर्थियों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। वर्ष 2022 में राज्य मेडिकल बोर्ड ने कुछ प्रमाणपत्रों की जांच की थी, जिसमें कई फर्जी पाए गए थे। इसके बाद हाईकोर्ट और न्यायालय आयुक्त दिव्यांगजन ने 22 नवंबर 2025 को सुनवाई के दौरान शिक्षा विभाग को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे।

कोर्ट के आदेश पर अब एम्स ऋषिकेश में न्यूरोसर्जन और स्वास्थ्य विभाग के अन्य विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम यह जांच कर रही है। स्वास्थ्य महानिदेशक सुनीता टम्टा ने भी जांच की पुष्टि की है। शिक्षा विभाग का यह कदम फर्जीवाड़े पर लगाम लगाने और आरक्षण व्यवस्था में पारदर्शिता लाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जांच के नतीजों के आधार पर दोषी पाए जाने वाले शिक्षकों के खिलाफ विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई होने की संभावना है।

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