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उत्तराखंड में भाजपा का इंटरनल सर्वे, विधायकों को ग्रीन, येलो और रेड जोन में बांटा, किसके लिए बजी खतरे की घंटी…?

देहरादून: उत्तराखंड में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आगामी 2027 विधानसभा चुनाव के लिए श्मिशन 2027श् के तहत अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी द्वारा कराया गया आंतरिक (इंटरनल) सर्वे अब प्रदेश की राजनीतिक चर्चा का प्रमुख केंद्र बन गया है। सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह गोपनीय सर्वे विधायकों के प्रदर्शन, जनसंपर्क, संगठनात्मक गतिविधियों, स्थानीय मुद्दों पर काम और कार्यकर्ताओं की राय जैसे कई पैरामीटर पर आधारित है। इस सर्वे के आधार पर मौजूदा भाजपा विधायकों को तीन जोनों में वर्गीकृत किया गया हैकृग्रीन जोन, यलो जोन और रेड जोन।

  • ग्रीन जोन में वे विधायक शामिल हैं, जिनकी अपनी सीट पर स्थिति मजबूत मानी जा रही है और जनता व संगठन में उनकी पकड़ अच्छी है। इनके टिकट मिलने की संभावना सबसे अधिक है।
  • यलो जोन में ऐसे विधायक रखे गए हैं, जिनके प्रदर्शन में सुधार की गुंजाइश है। इन पर पार्टी की कड़ी नजर बनी हुई है और उन्हें बेहतर परिणाम दिखाने का मौका दिया जा सकता है।
  • रेड जोन सबसे चिंताजनक है, जहां शामिल विधायकों के खिलाफ ग्राउंड फीडबैक नकारात्मक आया है। क्षेत्र में असंतोष, निष्क्रियता, संगठन से दूरी या एंटी-इनकंबेंसी जैसे संकेत मिले हैं। सूत्रों के मुताबिक, रेड जोन में आने वाले विधायकों का टिकट कटने की प्रबल संभावना है।

कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि 19 से 23 तक सिटिंग विधायकों को श्डेंजर जोनश् या रेड कैटेगरी में रखा गया है, जबकि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने इसे हार के डर से 23 विधायकों का टिकट काटने की तैयारी करार दिया है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि यह सर्वे तीन स्तरों या डबल लेयर में कराया जा रहा है, जिसमें अलग-अलग एजेंसियां शामिल हैं ताकि पक्षपात से बचा जा सके। भाजपा का उद्देश्य कमजोर कड़ियों की समय रहते पहचान करना और उन क्षेत्रों में नए चेहरे या मजबूत विकल्प तैयार करना है, जिससे 2022 की तरह प्रचंड बहुमत के साथ हैट्रिक लगाई जा सके।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा इस बार चुनाव से काफी पहले ही रणनीति तय कर रही है, ताकि कोई आश्चर्य न हो। हालांकि, पार्टी की ओर से इस आंतरिक सर्वे पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन अंदरखाने इस रिपोर्ट ने कई विधायकों में बेचौनी पैदा कर दी है।

आने वाले महीनों में रेड और यलो जोन के विधायकों पर संगठनात्मक दबाव बढ़ने और उनके कामकाज की लगातार समीक्षा होने की उम्मीद है। यह सर्वे उत्तराखंड की सियासत में 2027 के महासंग्राम की शुरुआती पटकथा साबित हो रहा है, जिसने अभी से टिकट वितरण और उम्मीदवार चयन को लेकर हलचल तेज कर दी है।

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