देहरादून: उत्तराखंड में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश संगठन में बड़े बदलाव के मजबूत संकेत मिल रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर पर नए कार्यकारी अध्यक्ष की नियुक्ति के बाद अब राज्य इकाई में भी नेतृत्व और प्रमुख पदाधिकारियों में फेरबदल की कवायद तेज हो गई है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, आगामी विधानसभा चुनावों (2027) को ध्यान में रखते हुए ऐसे चेहरों से दूरी बनाने की रणनीति अपनाई जा रही है, जिनकी जनता के बीच छवि विवादास्पद या नकारात्मक मानी जाती है।
भाजपा का स्पष्ट मकसद है कि चुनाव प्रचार के दौरान कोई विवादित नेता फ्रंटलाइन पर न दिखे। इसके बजाय पार्टी बेदाग छवि वाले, लोकप्रिय और साफ-सुथरे नेताओं को आगे लाने पर जोर दे रही है। उत्तराखंड में 2017 से सत्ता में काबिज भाजपा अब लगातार तीसरी बार सरकार बनाने की तैयारी में जुटी है। हाल ही में सभी सात मोर्चों (युवा मोर्चा, महिला मोर्चा, किसान मोर्चा, अनुसूचित जाति मोर्चा, अनुसूचित जनजाति मोर्चा, ओबीसी मोर्चा और अल्पसंख्यक मोर्चा) की प्रदेश टीमों की घोषणा के बाद संगठन को हर मोर्चे पर मजबूत दिखाने की कोशिश और तेज हो गई है।
पार्टी अब उन नेताओं की भूमिका सीमित करने या बदलने की दिशा में काम कर रही है, जो हाल के वर्षों में या पहले किसी विवाद में घिरे रहे हैं। राष्ट्रीय नेतृत्व की मंशा यही है कि चुनावी मैदान में कोई अनावश्यक विवाद न उभरे। इस फेरबदल की प्रक्रिया में युवा नेताओं को खास तवज्जो दी जा रही है—जैसा कि हाल के संगठनात्मक फैसलों में साफ नजर आ रहा है।
दूसरी पंक्ति के ऊर्जावान और युवा चेहरों को प्रमोट करके भाजपा दोहरे मकसद को साधना चाहती है, एक तरफ युवा वर्ग और नए मतदाताओं को पार्टी से जोड़ना, दूसरी तरफ भविष्य की मजबूत नेतृत्व पंक्ति तैयार करना। यह रणनीति न केवल संगठन को और मजबूत बनाएगी, बल्कि जनता के बीच पार्टी की सकारात्मक और आधुनिक छवि को भी मजबूती देगी।
सूत्रों की मानें तो जल्द ही प्रदेश स्तर पर कई प्रमुख पदों पर नए और युवा चेहरों की घोषणा हो सकती है। यह बदलाव उत्तराखंड में भाजपा की चुनावी तैयारियों को नई गति देगा और लगातार तीसरी जीत के लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभाएगा।
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