Thursday , 24 September 2026
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उत्तराखंड : NEET UG फर्जी प्रमाणपत्र सिंडिकेट पर शिकंजा, रडार पर 12 संदिग्ध

  • 45 लाख में MBBS सीट का सौदा!
  • मास्टरमाइंड रूपेश पंडित और अरविंद जेल में।
  • एक ही स्वतंत्रता सेनानी के नाम पर चार फर्जी प्रमाणपत्र बनाने का आरोप।
  • दो लेखपाल भी निलंबित।

देहरादून। NEET UG के जरिए MBBS में दाखिले के नाम पर फर्जीवाड़े के मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, कथित सिंडिकेट की परतें खुलती जा रही हैं। पुलिस के मुताबिक, यह महज फर्जी प्रमाणपत्र तैयार करने तक सीमित मामला नहीं है, बल्कि अभ्यर्थियों की तलाश से लेकर रकम तय करने, दस्तावेज तैयार कराने और मेडिकल कॉलेज में दाखिले तक की पूरी प्रक्रिया को कथित तौर पर एक संगठित नेटवर्क की तरह संचालित किया जा रहा था।

मामले में कथित मास्टरमाइंड रूपेश पंडित और अरविंद कुमार की गिरफ्तारी के बाद SIT ने अब उन लोगों की तलाश तेज कर दी है, जिन्होंने इस नेटवर्क को चलाने, फर्जी दस्तावेज तैयार कराने और दाखिले की प्रक्रिया में मदद करने में कथित भूमिका निभाई। एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल के अनुसार, 12 संदिग्ध फिलहाल SIT के रडार पर हैं।

45 लाख में एक MBBS सीट का कथित सौदा

जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार, रूपेश पंडित ने MBBS में दाखिला दिलाने के लिए प्रति अभ्यर्थी करीब 45 लाख रुपये में सौदा किया था। उत्तराखंड में तीन छात्राओं को स्वतंत्रता सेनानी कोटे से सरकारी MBBS सीट दिलाने का भरोसा देकर उनके परिजनों से 20-20 लाख रुपये एडवांस लिए जाने का आरोप है। यानी केवल तीन अभ्यर्थियों से ही 60 लाख रुपये की अग्रिम रकम लिए जाने की बात जांच में सामने आई है। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि इस रकम का भुगतान किस माध्यम से हुआ और पैसा आगे किन-किन लोगों तक पहुंचा।

एक ही स्वतंत्रता सेनानी के नाम पर चार फर्जी प्रमाणपत्र!

मामले का एक और गंभीर पहलू यह है कि दो अलग-अलग मुकदमों की जांच में अब तक चार अभ्यर्थियों के नाम सामने आए हैं। आरोप है कि इन अभ्यर्थियों के लिए एक ही स्वतंत्रता सेनानी धर्मवीर वर्मा के नाम से फर्जी स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र तैयार किए गए। SIT अब यह पता लगा रही है कि इन प्रमाणपत्रों को किसने तैयार किया, आवेदन किसने करवाए, दस्तावेज कहां से जुटाए गए और सरकारी सत्यापन की प्रक्रिया में किन लोगों की भूमिका रही। यदि आरोपियों के मोबाइल फोन और बैंक खातों से ठोस साक्ष्य मिलते हैं तो जांच कथित सिंडिकेट के अन्य सदस्यों तक पहुंच सकती है।

पहले ग्राहक खोजे फिर तैयार होता था पूरा खेल

पुलिस की जांच के अनुसार, कथित नेटवर्क ऐसे अभ्यर्थियों और उनके परिजनों की तलाश करता था, जिन्हें NEET में अपेक्षित अंक नहीं मिले थे या मनचाहे मेडिकल कॉलेज में दाखिला नहीं मिल पा रहा था। ऐसे अभ्यर्थियों को सामान्य प्रक्रिया से हटकर MBBS में दाखिला दिलाने का भरोसा दिया जाता था। इसके बाद अभ्यर्थी की श्रेणी और जरूरत के हिसाब से कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार कराने और दाखिले की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की व्यवस्था की जाती थी।

सिंडिकेट में बंटी हुई थीं जिम्मेदारियां

SIT को अब तक मिले इनपुट के मुताबिक, कथित नेटवर्क में काम अलग-अलग स्तर पर बांटा गया था। एक समूह अभ्यर्थियों और उनके परिजनों की तलाश करता था, दूसरा दस्तावेज और प्रमाणपत्र तैयार कराने में जुटता था और कुछ लोग दाखिले की प्रक्रिया को अंजाम तक पहुंचाने में भूमिका निभाते थे। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि सौदे की रकम कौन तय करता था, पैसा कौन वसूलता था और रकम का बंटवारा किन लोगों के बीच होता था।

दो लेखपाल निलंबित

फर्जी प्रमाणपत्रों की प्रक्रिया में कथित सरकारी मिलीभगत की आशंका ने मामले को और गंभीर बना दिया है। प्रशासन ने जांच के बाद दो लेखपालों को निलंबित किया है। जांच में दोनों लेखपालों के पुराने रिकॉर्ड और पूर्व शिकायतों को भी खंगाला जा रहा है। आरोप है कि एक लेखपाल ने बिना मौके पर निरीक्षण किए बेहद कम समय में दस्तावेज तैयार कर दिए, जबकि दूसरे पर भी बिना स्थल निरीक्षण के प्रमाणपत्र प्रक्रिया पूरी करने का आरोप है। अब SIT और प्रशासन यह जांच रहे हैं कि प्रमाणपत्रों के सत्यापन की प्रक्रिया में कहीं जानबूझकर नियमों को दरकिनार तो नहीं किया गया।

मोबाइल और बैंक खातों से खुलेगा कथित नेटवर्क का राज

रूपेश पंडित और अरविंद कुमार के मोबाइल फोन फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं। पुलिस की नजर आरोपियों की कॉल डिटेल, WhatsApp चैट, डिजिटल दस्तावेज और बैंक खातों पर है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि आरोपियों के संपर्क में कौन-कौन से अभ्यर्थी, अभिभावक, बिचौलिए और सरकारी या निजी क्षेत्र से जुड़े लोग थे। SIT के लिए अब सबसे अहम सवाल यही है कि 45 लाख रुपये के कथित सौदे से लेकर फर्जी प्रमाणपत्र और मेडिकल कॉलेज में दाखिले तक पूरी श्रृंखला में कौन-कौन लोग शामिल थे।

12 संदिग्धों पर SIT की नजर

एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल के मुताबिक, जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है और अब तक 12 संदिग्ध SIT के रडार पर हैं। पुलिस का कहना है कि साक्ष्य मिलने पर अन्य आरोपियों के खिलाफ भी गिरफ्तारी की कार्रवाई की जाएगी। देहरादून SSP देहरादून प्रमेंद्र डोबाल ने कहा कि इस मामले में SIT की जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। SIT की जांच में अब तक 12 संदिग्ध रडार पर हैं। निश्चित तौर पर अगले कुछ दिनों में उनकी भी गिरफ्तारी की जाएगी।”

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