Friday , 4 April 2025
Breaking News

उड़ती फ्लाइट में 5 डॉक्टरों ने किया चमत्कार, 2 साल की बच्ची को दिया जीवनदान…

वो कहावत है ना…“जाको राखे साइयां मार सके न कोई…” कुछ ऐसी ही एक उड़ती फ्लाईट में देखने को मिला. बेंगलुरु से दिल्ली जा रही एक फ्लाइट में रविवार की शाम एक ऐसा चमत्कार हुआ, जिसकी किसीने कल्पना भी नहीं की होगी. फ्फ्लिते में अचनक 2 साल की बच्ची की तबीयत बिगड़ गई. उसी फ्लाइट में सफर कर रहे 5 डॉक्टर्स ने उड़ती फ्लाइट में ही बच्ची का इलाज कर दिया. AIIMS के डॉक्टरों के इस कमाल की वजह से ही 2 साल कि बच्ची की जान बच पाई.

TV9 की रिपोर्ट के अनुसार यह माला रविवार की शाम का है. बेंगलुरु से विस्तारा की UK-814 फ्लाइट दिल्ली के लिए उड़ी. चलती फ्लाइट में इमरजेंसी कॉल की घोषणा की गई. 2 साल की बच्ची जो कि सियानोटिक बीमारी से पीड़ित थी, वह बेहोश थी. फ्लाइट में ही बच्ची की हालत बिगड़ गई, इस दौरान उसकी पल्स गायब थी और हाथ-पैर भी ठंडे पड़ गए थे. जब इमरजेंसी कॉल ली गई तो फ्लाइट में मौजूद AIIMS के डॉक्टर मदद के लिए आगे आए.

AIIMS के डॉक्टर्स ने बच्ची का CPR शुरू किया और उनके पास जो भी संसाधन मौजूद थे, उसके साथ काम शुरू किया. इस दौरान फ्लाइट में ही IV कैनुला दिया गया और डॉक्टर्स ने इमरजेंसी प्रोसेस को स्टार्ट किया. मुश्किल तब बढ़ी जब इस इलाज के दौरान ही बच्ची को कार्डिएक अरेस्ट हुआ और बाद में AED का इस्तेमाल हुआ. इस दौरान करीब 45 मिनट तक डॉक्टरों ने बच्ची का ट्रीटमेंट किया.

उनके पास जो भी संसाधन थे, उनके यूज से बच्ची की जान बचा ली गई. 45 मिनट तक इलाज होने के बाद फ्लाइट को नागपुर भेजा गया और यहां चाइल्ड स्पेशलिस्ट को सौंपा गया. बच्ची की हालत अब खतरे से बाहर है. AIIMS के जो पांच डॉक्टर इस चमत्कार में शामिल थे, उसमें एनेस्थीसिया विभाग की डॉ. नवदीप कौर, SR कार्डियक रेडियोलॉजी डॉ. दमनदीप सिंह, पूर्व SR AIIMS रेडियोलॉजी डॉ. ऋषभ जैन, पूर्व SR AIIMS एसआर ओबीजी डॉ. ओइशिका और SR कार्डियक रेडियोलॉजी डॉ. अविचला टैक्सक शामिल थे.

क्या होती है सियानोटिक

सियानोटिक की बात करें तो ये एक जन्मजात बीमारी है. जिसमें हार्ट की आर्टरीज और शरीर में ऑक्सीजन की कमी होने लगती है. इससे स्किन नीली पड़ जाती है, अचानक सांस लेने में परेशानी होने लगती है. समय पर ट्रीटमेंट न मिलने से मौत तक हो सकती है. इस परेशानी को कॉन्जेनिटल हार्ट डिजीज भी कहा जाता है. कई मामलों मे बच्चे के जन्म के बाद इस डिजीज के लक्षण पता नहीं चलते हैं. ऐसे में जरूरी है कि प्रेगनेंसी की दौरान महिलाएं अपने सेहत का ध्यान रखें. समय समय पर जांच कराती रहें.

ये बीमारी हार्ट डिजीज की फैमिली हिस्ट्री और प्रेग्नेंसी को दौरान हुए किसी वायरल संक्रमण के कारण बच्चे को हो जाती है. इस बीमारी में बच्चे की दिल की धड़कन तेज हो जाती है, स्किन का रंग पीला होने लगता है और ऑर्गन में सूजन आ जाती है और चक्कर आने लगते हैं. सियानोटिक एक जानलेवा बीमारी होती है. अगर समय पर इसका इलाज न हो तो पीड़ित की जान जाने का भी जोखिम रहता है.

About प्रदीप रावत 'रवांल्टा'

Has more than 19 years of experience in journalism. Has served in institutions like Amar Ujala, Dainik Jagran. Articles keep getting published in various newspapers and magazines. received the Youth Icon National Award for creative journalism. Apart from this, also received many other honors. continuously working for the preservation and promotion of writing folk language in ranwayi (uttarakhand). Doordarshan News Ekansh has been working as Assistant Editor (Casual) in Dehradun for the last 8 years. also has frequent participation in interviews and poet conferences in Doordarshan's programs.

Check Also

उत्तराखंड: विदाई से पहले मानसून दिखा रहा तेवर, 7 जिलों के रेड, 6 जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी

देहरादून: मानसून जाने से पहले तेवर दिखा रहा है। मौसम विभाग की ओर से प्रदेश …

error: Content is protected !!