Sunday , 1 November 2026
Breaking News

बदरीनाथ के ऊपर मंडरा रहा ग्लेशियर टूटने का खतरा, 398 इमारतों समेत कई अहम ढांचे हो सकते हैं प्रभावित

  • बदरीनाथ धाम के ऊपर लटकते ग्लेशियरों से आपदा का खतरा, वैज्ञानिक अध्ययन में चेतावनी।
  • तीन हैंगिंग ग्लेशियरों का किया गया अध्ययन, सबसे संवेदनशील ग्लेशियर के टूटने से बदरीनाथ क्षेत्र में व्यापक नुकसान की आशंका।

देहरादून। उत्तराखंड के विश्वप्रसिद्ध बदरीनाथ धाम के ऊपर स्थित तीन लटकते ग्लेशियर भविष्य में गंभीर प्राकृतिक आपदा का कारण बन सकते हैं। एक नए वैज्ञानिक अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि इन ग्लेशियरों में से सबसे संवेदनशील ग्लेशियर यदि टूटकर नीचे गिरता है तो बदरीनाथ क्षेत्र में व्यापक नुकसान होने की आशंका है।

वैज्ञानिकों ने बदरीनाथ धाम के ऊपरी हिमालयी क्षेत्र में स्थित तीन हैंगिंग ग्लेशियरों की स्थिति और उनसे संभावित खतरों का अध्ययन किया है। अध्ययन में ग्लेशियरों के टूटने अथवा हिमखंड के नीचे की ओर खिसकने की स्थिति में संभावित प्रभावों का आकलन किया गया।

रिपोर्ट के अनुसार, सबसे संवेदनशील ग्लेशियर के ढहने की स्थिति में बड़ी मात्रा में बर्फ और चट्टानी मलबा तेजी से निचले क्षेत्रों की ओर बढ़ सकता है। इससे बदरीनाथ धाम और आसपास के इलाकों में नुकसान की आशंका जताई गई है।

हिमालयी क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन और बढ़ते तापमान के बीच ग्लेशियरों की स्थिति को लेकर वैज्ञानिक लगातार चिंता जता रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में स्थित लटकते ग्लेशियरों की नियमित निगरानी और संभावित खतरों का समय रहते आकलन करना बेहद जरूरी है।

बदरीनाथ धाम देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है और हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। ऐसे में वैज्ञानिक अध्ययन में सामने आए संभावित खतरे को देखते हुए क्षेत्र की निरंतर निगरानी, आपदा पूर्व चेतावनी प्रणाली और सुरक्षा तैयारियों को मजबूत करने की जरूरत महसूस की जा रही है।

हालांकि वैज्ञानिक अध्ययन में संभावित खतरे को लेकर चेतावनी दी गई है, लेकिन इसे तत्काल आपदा की भविष्यवाणी नहीं माना जा सकता। विशेषज्ञों के अनुसार, जोखिम को कम करने के लिए ग्लेशियरों की वैज्ञानिक निगरानी और समय-समय पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक हैं।

About AdminIndia

Check Also

गैरसैंण या सियासी पिकनिक स्पॉट? 12 साल में 35 दिन का विधानसभा सत्र, जनता के सवाल फिर रह गए पीछे!

गैरसैंण की पहाड़ियों ने एक बार फिर उत्तराखंड की राजनीति का वही पुराना नजारा देखा। …

error: Content is protected !!