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कुमाऊं विवि के कुलपति पद की दौड़ में दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. केपी सिंह की दावेदारी से चर्चाओं का बाजार गर्म

नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय के नए कुलपति की नियुक्ति प्रक्रिया के बीच दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर केपी सिंह के नाम को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। प्रो. सिंह के कुलपति पद के लिए आवेदन करने की बात सामने आने के बाद विश्वविद्यालय के शैक्षणिक हलकों में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या इस बार भी कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति की कुर्सी किसी बाहरी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर को मिलेगी? चर्चा इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि प्रो. के.पी. सिंह उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट (से.) गुरमीत सिंह पर पुस्तकें लिख चुके हैं।

सूत्रों के अनुसार प्रो. के.पी. सिंह ने दिल्ली विश्वविद्यालय से एनओसी भी प्राप्त कर ली है। हालांकि, एनओसी मिलने मात्र से उनकी दावेदारी मजबूत होने या नियुक्ति तय होने की पुष्टि नहीं होती। अंतिम फैसला निर्धारित चयन प्रक्रिया और साक्षात्कार के बाद ही होगा। इसके बावजूद उनका नाम सामने आने से कुलपति चयन को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।

करीब 80 दावेदार, अब स्क्रीनिंग पर निगाह

कुलपति पद के लिए आवेदन की प्रक्रिया 10 अगस्त को पूरी हो चुकी है। सामने आई जानकारी के मुताबिक करीब 80 प्रोफेसरों ने आवेदन किया है। इनमें कुमाऊं विश्वविद्यालय के छह वरिष्ठ प्रोफेसर भी शामिल हैं। इसके अलावा विश्वविद्यालय के दो पूर्व कुलपतियों ने भी एक बार फिर कुलपति पद के लिए दावेदारी पेश की है।

अब सबसे महत्वपूर्ण चरण आवेदनों की स्क्रीनिंग का है। इसमें अभ्यर्थियों की शैक्षणिक योग्यता, प्रशासनिक अनुभव और निर्धारित पात्रता मानकों की जांच की जाएगी। स्क्रीनिंग के लिए 17 और 22 अगस्त की तिथियों को लेकर मंथन चल रहा है।

स्क्रीनिंग के बाद सामने आएंगे शीर्ष तीन नाम

स्क्रीनिंग पूरी होने के बाद योग्य उम्मीदवारों में से शीर्ष तीन नामों का चयन किए जाने की संभावना है। इसके बाद इन नामों का साक्षात्कार होगा और चयन प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा। माना जा रहा है कि साक्षात्कार के बाद कुलपति के नाम पर अंतिम मुहर लग सकती है। ऐसे में फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि करीब 80 दावेदारों में से किन तीन नामों को अंतिम पैनल में जगह मिलती है और क्या प्रो. केपी सिंह इस सूची में शामिल होते हैं।

दो पूर्व कुलपति भी मैदान में

इस बार कुलपति पद की दौड़ में कुमाऊं विश्वविद्यालय के दो पूर्व कुलपतियों के शामिल होने से मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। दोनों पहले विश्वविद्यालय का नेतृत्व कर चुके हैं और विश्वविद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था से भली-भांति परिचित हैं।

वहीं, विश्वविद्यालय के छह वरिष्ठ प्रोफेसरों ने भी आवेदन किया है। ऐसे में चयन समिति के सामने स्थानीय अनुभव, प्रशासनिक दक्षता और बाहरी विश्वविद्यालयों के अकादमिक अनुभव के बीच संतुलन बनाने की चुनौती भी होगी।

सेवा विस्तार के बीच शुरू हुई नए कुलपति की तलाश

वर्तमान कुलपति प्रो. डीएस रावत का तीन वर्षीय कार्यकाल 20 जुलाई को पूरा हो चुका है। इसके बाद उन्हें छह माह का सेवा विस्तार दिया गया है। इसी बीच नए कुलपति की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की गई।

प्रो. रावत ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने दूसरे कार्यकाल के लिए आवेदन नहीं किया है। अब विश्वविद्यालय में नए कुलपति की नियुक्ति को लेकर अंतिम फैसला स्क्रीनिंग, शॉर्टलिस्टिंग और साक्षात्कार के बाद होना है।

अब इन सवालों के जवाब का इंतजार

कुलपति चयन प्रक्रिया के अगले चरण में पहुंचने के साथ विश्वविद्यालय में कई सवाल चर्चा में हैं—क्या पूर्व कुलपति फिर से शीर्ष दौड़ में होंगे? क्या कुमाऊं विश्वविद्यालय के किसी वरिष्ठ प्रोफेसर को मौका मिलेगा? या फिर दिल्ली विश्वविद्यालय समेत किसी अन्य विश्वविद्यालय से बाहरी प्रोफेसर की एंट्री होगी?

इन सभी सवालों का जवाब स्क्रीनिंग के बाद सामने आने वाले शीर्ष तीन नामों से काफी हद तक मिल जाएगा। फिलहाल निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रो. केपी सिंह समेत करीब 80 दावेदारों में से कौन अंतिम दौड़ में जगह बनाता है और कुमाऊं विश्वविद्यालय का अगला कुलपति कौन बनता है।

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