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चारधाम यात्रा : 29 दिनों में 55 यात्रियों की मौत से बढ़ी चिंता

देहरादून : उत्तराखंड में चल रही चारधाम यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने के बाद अब तक 15 लाख 63 हजार 672 श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। अनुमान लगाया जा रहा है कि मानसून सीजन शुरू होने से पहले यह संख्या 25 लाख के करीब पहुंच सकती है। हालांकि, यात्रा के दौरान लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की मौतों ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है।

चारधाम यात्रा की शुरुआत 19 अप्रैल को गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ हुई थी। इसके बाद 22 अप्रैल को Kedarnath Temple और 23 अप्रैल को Badrinath Temple के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। यात्रा शुरू होने के बाद से खासकर केदारनाथ और बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। खराब मौसम, बारिश और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी के बावजूद यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार, 17 मई तक चारधाम यात्रा मार्गों पर 55 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है। इनमें अधिकांश मौतें हृदय गति रुकने और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण हुई हैं। सबसे अधिक 30 श्रद्धालुओं की मौत केदारनाथ यात्रा मार्ग पर हुई है। इसके अलावा बदरीनाथ मार्ग पर 10, यमुनोत्री मार्ग पर आठ और गंगोत्री मार्ग पर सात श्रद्धालुओं की जान जा चुकी है। बीते दिन भी केदारनाथ यात्रा मार्ग पर दो श्रद्धालुओं की मौत दर्ज की गई।

चारधाम यात्रा में लगातार बढ़ रही मौतों की घटनाएं स्वास्थ्य विभाग के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं। इस संबंध में उत्तराखंड के स्वास्थ्य मंत्री Subodh Uniyal ने कहा कि सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है और यात्रा मार्गों पर स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि यात्रा शुरू होने से पहले विभिन्न भाषाओं में हेल्थ एडवाइजरी जारी की गई थी।

स्वास्थ्य विभाग ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर और शुगर जैसी बीमारियों से पीड़ित लोग यात्रा पर निकलने से पहले स्वास्थ्य परीक्षण अवश्य कराएं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ऑक्सीजन की कमी और कठिन यात्रा मार्ग बुजुर्ग तथा बीमार यात्रियों के लिए जोखिम बढ़ा सकते हैं।

गौरतलब है कि चारधाम यात्रा को शुरू हुए अभी केवल एक महीना ही हुआ है, जबकि यात्रा में अभी करीब पांच महीने का समय बाकी है। आने वाले मानसून सीजन में यात्रा मार्ग और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। ऐसे में श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार और स्वास्थ्य विभाग के लिए बड़ी जिम्मेदारी बन गया है।

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