देहरादून। संयुक्त राष्ट्र महासभा की ओर से 27 नवंबर को ‘बाल विवाह, कम उम्र और जबरन विवाह की समाप्ति के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस’ घोषित किए जाने का जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) के उत्तराखंड नेटवर्क ने स्वागत किया है। संगठन ने इसे बाल विवाह के खिलाफ भारत में चलाए जा रहे जमीनी अभियानों को मिली वैश्विक मान्यता बताया है।
जेआरसी के राज्य समन्वयक गजेन्द्र नौटियाल ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र का यह निर्णय बाल विवाह के खिलाफ लंबे समय से चलाए जा रहे नागरिक समाज के प्रयासों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि भारत से उठी बाल विवाह के खिलाफ आवाज अब वैश्विक संकल्प का हिस्सा बन गई है।
उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में जेआरसी के सहयोगी संगठन—समर्पण सोसायटी देहरादून, अर्पण संस्था पिथौरागढ़, इंस्टीट्यूट फॉर सोशल डेवलपमेंट ऊधमसिंह नगर और अपराजिता संस्था हरिद्वार—सरकार एवं प्रशासन के सहयोग से बाल विवाह रोकने और बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए अभियान चला रहे हैं।
नौटियाल ने कहा कि 27 नवंबर की तारीख का विशेष महत्व है। इसी दिन वर्ष 2024 में भारत सरकार ने नागरिक समाज संगठनों को साथ लेकर ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान की शुरुआत की थी। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की घोषणा के बाद अब चुनौती इस वैश्विक संकल्प को जमीनी स्तर पर लागू करने की है। जब तक किसी गांव का एक भी बच्चा बाल विवाह के खतरे में है, तब तक यह लड़ाई पूरी नहीं मानी जा सकती।
उन्होंने कहा कि बाल विवाह की रोकथाम के लिए केवल कानूनी कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। इसके लिए स्कूलों, पंचायतों और गांवों में व्यापक जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। लोगों को बाल विवाह के खिलाफ शपथ दिलाने के साथ आर्थिक रूप से कमजोर और बाल विवाह के लिहाज से संवेदनशील परिवारों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों को दोबारा स्कूल से जोड़ने तथा धर्मगुरुओं, शिक्षकों, पुलिसकर्मियों और जनप्रतिनिधियों को अभियान में शामिल किया जा रहा है।
67 देशों के समर्थन से संयुक्त राष्ट्र में पहुंचा प्रस्ताव
जेआरसी के अनुसार, संगठन के संस्थापक भुवन ऋभु ने बाल विवाह के खात्मे के लिए अलग अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित करने की पहल की थी। मार्च 2026 में संयुक्त राष्ट्र में अपने संबोधन के दौरान उन्होंने बाल विवाह के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित करने के लिए प्रस्ताव लाने की बात कही थी। इस पहल को सिएरा लियोन की फर्स्ट लेडी डॉ. फातिमा मादा बायो ने भी समर्थन दिया।
इसके बाद सिएरा लियोन ने भारत समेत 67 देशों के समर्थन वाला प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र महासभा में पेश किया। प्रस्ताव में 27 नवंबर को बाल विवाह, कम उम्र और जबरन विवाह की समाप्ति के लिए समर्पित अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित करने की मांग की गई थी। 4 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।
देश के 782 जिलों में अभियान का दावा
जेआरसी का कहना है कि उसके सहयोगी संगठन देश के सभी 782 जिलों में बाल विवाह के खिलाफ अभियान चला रहे हैं। सरकारों और कानून-प्रवर्तन एजेंसियों के सहयोग से समुदायों, स्कूलों, पंचायतों, आदिवासी एवं वंचित समुदायों, महिलाओं, पुलिसकर्मियों, धर्मगुरुओं और जनप्रतिनिधियों को इस अभियान से जोड़ा गया है।
संगठन के अनुसार, उसके सहयोगी संगठनों ने देशभर में अब तक 5.50 लाख से अधिक बाल विवाह रुकवाए हैं। जेआरसी का कहना है कि सरकार, नागरिक समाज और समुदाय के सामूहिक प्रयासों से बाल विवाह की रोकथाम संभव है।
बाल विवाह की दर में गिरावट
जेआरसी के अनुसार, राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (2019-21) में देश में 18 वर्ष से कम उम्र में विवाह करने वाली लड़कियों का अनुपात 23.3 प्रतिशत था, जो राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (2023-24) में घटकर 20.1 प्रतिशत रह गया। संगठन ने इसे बाल विवाह के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों के प्रभाव का संकेत बताया है।
भारत सरकार ने वर्ष 2026 तक बाल विवाह की दर को 10 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। वहीं बाल विवाह को वर्ष 2030 तक समाप्त करने की वैश्विक प्रतिबद्धता सतत विकास लक्ष्य-5 के लक्ष्य 5.3 के अनुरूप है, जिसमें बाल विवाह, कम उम्र और जबरन विवाह जैसी हानिकारक प्रथाओं को समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया है।
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