Friday , 18 September 2026
Breaking News

टीएमसी के नाम और चुनाव चिह्न पर रोक, चुनाव आयोग का अंतरिम आदेश

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद के बीच चुनाव आयोग ने बड़ा अंतरिम फैसला लिया है। आयोग ने आगामी विधानसभा उपचुनावों में तृणमूल कांग्रेस के दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और पार्टी के आरक्षित ‘जोड़ाफूल-घास’ चुनाव चिह्न के इस्तेमाल से रोक दिया है। दोनों गुटों को अब अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न के साथ उपचुनाव लड़ना होगा।

चुनाव आयोग के इस आदेश के बाद ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने अपना विरोध दर्ज कराया है। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, ममता बनर्जी गुट ने गुरुवार रात 11 बजकर 36 मिनट पर आयोग के अंतरिम आदेश का जवाब दाखिल किया। गुट ने अपनी पसंद के तीन नाम और तीन चुनाव चिह्न के विकल्प आयोग को सौंपे हैं। यह जवाब कड़े विरोध के साथ दाखिल किया गया। आयोग ने दोनों गुटों को शुक्रवार सुबह 11 बजे तक तीन-तीन पसंदीदा नाम और तीन-तीन मुक्त चुनाव चिह्न के विकल्प देने को कहा था। आयोग इनमें से किसी एक नाम और चिह्न को संबंधित गुट के लिए आवंटित कर सकता है।

क्या है विवाद?

तृणमूल कांग्रेस के संगठनात्मक नियंत्रण, पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले दो गुटों के बीच विवाद चल रहा है। दोनों गुट खुद को वास्तविक तृणमूल कांग्रेस बताते हुए पार्टी के नाम और आरक्षित चुनाव चिह्न पर दावा कर रहे हैं।

चुनाव आयोग ने कहा है कि दोनों पक्षों के वास्तविक पार्टी होने के दावे के कारण चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968 के पैराग्राफ 15 के तहत इस मामले पर विचार किया जा रहा है। अंतिम फैसला होने तक दोनों पक्षों को समान स्थिति में रखने के लिए आयोग ने अंतरिम व्यवस्था लागू की है।

उपचुनाव से पहले बढ़ा विवाद

यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होने हैं। दोनों गुटों ने इन सीटों से अपने-अपने उम्मीदवार उतारे हैं और पार्टी की पहचान को लेकर दावा किया है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने नंदीग्राम से संचिता प्रधान (डे) और रेजीनगर से रबिउल आलम चौधरी को उम्मीदवार बनाया है। वहीं, ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने भी दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं।

जुलाई से चल रही है आयोग में सुनवाई

पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर विवाद इस साल जुलाई में चुनाव आयोग के समक्ष पहुंचा था। इसके बाद आयोग ने दोनों पक्षों से पार्टी के संगठनात्मक नियंत्रण, अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं, पार्टी की संपत्तियों, संगठनात्मक ढांचे, नाम और चुनाव चिह्न से जुड़े दस्तावेज और जवाब मांगे।

दोनों पक्ष आयोग के समक्ष अपनी दलीलें और दस्तावेज पेश कर चुके हैं। आयोग अब इस मामले में अंतिम निर्णय की प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है। तब तक दोनों गुटों को नए नाम और अलग चुनाव चिह्न के साथ उपचुनाव लड़ना होगा।

About AdminIndia

Check Also

बड़ा खुलासा: उत्तराखंड की जनता के पैसे से बिजली, छत्तीसगढ़ में प्लांट! 1320 MW सौदे पर कांग्रेस का हमला

1320 मेगावाट बिजली खरीद पर कांग्रेस का हमला, पवन खेड़ा ने टेंडर प्रक्रिया पर उठाए …

error: Content is protected !!