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2027 की सियासी जंग : सहसपुर में हरक सिंह रावत की दावेदारी से कांग्रेस में हलचल

देहरादून। उत्तराखंड की सहसपुर विधानसभा सीट पर 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। राज्य गठन के बाद इस सीट पर भाजपा और कांग्रेस के बीच मुख्य मुकाबला रहा है। अब तक हुए पांच विधानसभा चुनावों में भाजपा ने चार बार जीत दर्ज की है, जबकि कांग्रेस को सिर्फ 2002 में सफलता मिली थी। ऐसे में आगामी चुनाव में सहसपुर का सियासी समीकरण दिलचस्प होने के आसार हैं।

राज्य गठन से पहले सहसपुर विधानसभा सीट चकराता विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा थी। वर्ष 2002 में राज्य गठन के बाद हुए पहले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी साधुराम ने जीत दर्ज की थी। इसके बाद कांग्रेस इस सीट पर दोबारा जीत हासिल नहीं कर सकी। पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने सहसपुर को अपनी राजनीतिक जमीन बनाने की कोशिश की, लेकिन चुनावी सफलता नहीं मिली। वर्ष 2007 में भाजपा के राजकुमार ने सहसपुर से जीत दर्ज की। इसके बाद 2012, 2017 और 2022 में भाजपा के सहदेव पुंडीर लगातार तीन बार विधायक चुने गए। इस तरह पिछले चार विधानसभा चुनावों से सीट पर भाजपा का कब्जा है।

कांग्रेस में दावेदारों की लंबी कतार

कांग्रेस ने वर्ष 2012 और 2022 के विधानसभा चुनाव में आर्येंद्र शर्मा पर भरोसा जताया, लेकिन दोनों ही बार उन्हें सफलता नहीं मिली। वर्ष 2017 में पूर्व मंत्री किशोर उपाध्याय ने भी कांग्रेस के टिकट पर सहसपुर से चुनाव लड़ा था। हालांकि, उन्हें भाजपा के सहदेव पुंडीर के हाथों हार का सामना करना पड़ा।

अब 2027 के चुनाव से पहले पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत के सहसपुर से चुनाव लड़ने की चर्चा ने कांग्रेस की सियासत को गरमा दिया है। हाल ही में सहसपुर क्षेत्र में एक संपर्क कार्यक्रम के दौरान रावत ने चुनाव लड़ने के संकेत दिए थे। उन्होंने कहा था कि पार्टी हाईकमान उन्हें जिस भी सीट से चुनाव लड़ने के लिए कहेगा, वह उसी सीट से चुनाव लड़ेंगे।

हरक सिंह रावत के इस बयान के बाद सहसपुर में कांग्रेस के भीतर राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। इस सीट से पहले से ही आर्येंद्र शर्मा टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। इनके अलावा राकेश नेगी और गुलजार अहमद के नाम भी संभावित दावेदारों के रूप में चर्चा में हैं।

भाजपा में भी टिकट को लेकर बढ़ी दावेदारी

सहसपुर भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता है, लेकिन 2027 से पहले पार्टी के भीतर भी टिकट को लेकर दावेदारी तेज हो गई है। लगातार तीन बार विधायक रहे सहदेव पुंडीर के सामने कई नेता अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुटे हैं।

भाजपा नेता नवीन ठाकुर, पूर्व दर्जाधारी भुवन विक्रम डबराल, ओमबीर सिंह राघव, पूर्व जिला पंचायत सदस्य लक्ष्मी अग्रवाल और विजयपाल सिंह बड़थ्वाल टिकट के दावेदारों में बताए जा रहे हैं। ऐसे में अब निगाहें भाजपा संगठन के फैसले पर हैं कि पार्टी सहदेव पुंडीर को लगातार चौथी बार मैदान में उतारती है या किसी नए चेहरे पर दांव लगाती है।

2022 में 8,355 वोट से जीते थे सहदेव पुंडीर

वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में सहसपुर सीट पर कुल 1,73,115 मतदाता थे, जिनमें से 1,23,465 मतदाताओं ने मतदान किया था। भाजपा के सहदेव पुंडीर को 64,008 वोट मिले, जबकि कांग्रेस के आर्येंद्र शर्मा को 55,653 वोट प्राप्त हुए। पुंडीर ने 8,355 वोट के अंतर से चुनाव जीता था। उनकी जीत का अंतर 6.68 प्रतिशत रहा।

वर्ष 2017 में सहदेव पुंडीर की जीत का अंतर 17.34 प्रतिशत था। पांच साल बाद 2022 में यह घटकर 6.68 प्रतिशत रह गया। इसी वजह से आगामी चुनाव को लेकर कांग्रेस और भाजपा दोनों ही सहसपुर में अपनी रणनीति को लेकर गंभीर नजर आ रही हैं। 2027 के चुनाव में यदि कांग्रेस हरक सिंह रावत को मैदान में उतारती है और भाजपा सहदेव पुंडीर के बजाय नए चेहरे पर दांव लगाती है, तो सहसपुर का चुनावी मुकाबला और भी रोचक हो सकता है। फिलहाल दोनों दलों में टिकट को लेकर दावेदारों की सक्रियता ने चुनावी माहौल बनाना शुरू कर दिया है।

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