नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और वैश्विक तेल संकट के बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi की ओर से देशवासियों से ईंधन बचाने, वर्क-फ्रॉम-होम अपनाने और एक साल तक सोना खरीदने से बचने की अपील अब बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गई है। विपक्ष ने इसे सरकार की आर्थिक विफलता से जोड़ते हुए केंद्र पर तीखा हमला बोला है।
प्रधानमंत्री मोदी ने हैदराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि पश्चिम एशिया के हालात का असर भारत की अर्थव्यवस्था, विदेशी मुद्रा भंडार और तेल आपूर्ति पर पड़ सकता है। उन्होंने लोगों से पेट्रोल-डीजल का कम इस्तेमाल करने, मेट्रो और कारपूलिंग को बढ़ावा देने, ऑनलाइन मीटिंग और वर्क-फ्रॉम-होम जैसी व्यवस्थाओं को फिर से अपनाने की अपील की।
साथ ही उन्होंने नागरिकों से एक साल तक गैर-जरूरी सोना खरीदने और विदेश यात्राओं से बचने का भी आग्रह किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए विदेशी मुद्रा बचाना बेहद जरूरी है। उन्होंने इसे “राष्ट्रहित में जिम्मेदार जीवनशैली” बताया।
हालांकि, प्रधानमंत्री की इस अपील पर कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi ने तीखी प्रतिक्रिया दी। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि “मोदी जी ने जनता से त्याग मांगे — सोना मत खरीदो, विदेश मत जाओ, पेट्रोल कम जलाओ, खाद और खाने का तेल कम करो, मेट्रो में चलो, घर से काम करो। ये उपदेश नहीं, नाकामी के सबूत हैं।”
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार अपनी जिम्मेदारियों से बचने के लिए आर्थिक बोझ जनता पर डाल रही है। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि यदि देश की आर्थिक स्थिति मजबूत है तो फिर लोगों से इस तरह की “किफायत मुहिम” चलाने की जरूरत क्यों पड़ रही है।
उधर, प्रधानमंत्री की अपील का असर शेयर बाजार में भी देखने को मिला। खासकर ज्वेलरी सेक्टर की कंपनियों के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। कई बड़ी ज्वेलरी कंपनियों के शेयर 10 प्रतिशत तक टूट गए।
सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई है। कुछ लोगों ने इसे संकट के समय जरूरी कदम बताया, जबकि कई यूजर्स ने इसे सरकार की आर्थिक नीतियों की विफलता करार दिया। रेडिट और अन्य प्लेटफॉर्म पर वर्क-फ्रॉम-होम की वापसी और संभावित महंगाई को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
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