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वरिष्ठ साहित्यकार महावीर रवांल्टा के नाम एक और उपलब्धि, ‘बलदेव मल्ल सम्मान-2025’ से किया जाएगा सम्मानित

पुरोला: हिन्दी साहित्य की गद्य विधा में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रसिद्ध साहित्यकार एवं रंगकर्मी महावीर रवांल्टा को प्रतिष्ठित ‘बलदेव मल्ल सम्मान-2025’ प्रदान किया जाएगा। यह सम्मान बी. एम. एन. सेवा संस्थान, लखनऊ द्वारा 22 फरवरी 2026 को उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, हजरतगंज, लखनऊ के निराला सभागार में आयोजित भव्य समारोह में प्रदान किया जाएगा।

सम्मान में स्मृति चिन्ह, अंगवस्त्र, प्रशस्तिपत्र के साथ-साथ नगद पुरस्कार राशि भी शामिल होगी। बी. एम. एन. सेवा संस्थान प्रतिवर्ष हिन्दी साहित्य के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करने वाले साहित्यकारों को यह सम्मान देता है।

इस अवसर पर उपन्यास विधा के लिए प्रबोध कुमार गोविल (जयपुर) को ‘पार्वती मल्ल सम्मान-2025’ तथा अनुवाद के क्षेत्र में बेबी कारफरमा (कोलकाता) को ‘गणेश मल्ल सम्मान-2025’ से नवाजा जाएगा।

महावीर रवांल्टा का जन्म 10 मई 1966 को उत्तराखंड के सुदूरवर्ती सरनौल गांव में हुआ था। वर्तमान में वे महरगांव में निवास करते हैं। अस्सी के दशक से सक्रिय लेखन शुरू करने वाले रवांल्टा ने अब तक उपन्यास, नाटक, कहानी, कविता, बाल साहित्य, लघुकथा, लोक साहित्य और रवांल्टी भाषा में कुल 46 पुस्तकें प्रकाशित की हैं। उनकी रचनाएं देशभर की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होने के साथ ही आकाशवाणी और दूरदर्शन पर भी नियमित प्रसारित होती रही हैं।

विभिन्न विश्वविद्यालयों में उनके साहित्य पर लघु शोध प्रबंध प्रस्तुत हो चुके हैं तथा कुछ शोधार्थी वर्तमान में शोधरत हैं। लोक साहित्य और रंगकर्म में गहरी रुचि रखने वाले रवांल्टा ने कई नाटकों का लेखन, निर्देशन और अभिनय किया है। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की संस्कार रंग टोली, विशेष बाल श्रमिक विद्यालय, कला दर्पण और मांडी विद्या निकेतन जैसी संस्थाओं द्वारा उनकी कहानियों पर आधारित नाटकों का मंचन हो चुका है।

उनके लोकप्रिय नाटक जैसे ‘सफेद घोड़े का सवार’, ‘एक प्रेमकथा का अंत’, ‘धुएं के बादल’ और ‘पोखू का घमंड’ रवांई क्षेत्र के लोक साहित्य पर आधारित हैं और पाठकों के बीच खूब चर्चित रहे हैं।

रवांल्टी भाषा के प्रचार-प्रसार में उनका योगदान विशेष है। भाषा-शोध एवं प्रकाशन केंद्र, वडोदरा (गुजरात) के भारतीय भाषा लोक सर्वेक्षण, उत्तराखंड भाषा संस्थान, देहरादून के भाषा सर्वेक्षण तथा ‘झिक्कल काम्ची ओडायली’ जैसे बहुभाषी शब्दकोश में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। रवांल्टी भाषा में लेखन और उसके प्रचार की शुरुआत का श्रेय भी मुख्य रूप से उन्हें ही जाता है।

उन्हें पहले उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान (गोविंद चातक पुरस्कार-2022), उमेश डोभाल स्मृति सम्मान, तिलाड़ी सम्मान, जनधारा सम्मान, उत्तराखंड उदय सम्मान, सेठ गोविंद दास सम्मान, वेद अग्रवाल स्मृति सम्मान, डॉ. बालशौरि रेड्डी सम्मान सहित अर्द्धशताधिक सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। उनकी लघुकथा ‘तिरस्कार’ पर आधारित लघु फिल्म भी बन चुकी है।

वर्तमान में महावीर रवांल्टा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, पुरोला में मुख्य फार्मेसी अधिकारी के पद पर सेवारत हैं। यह सम्मान उनके बहुआयामी साहित्यिक एवं सांस्कृतिक योगदान को एक बार फिर राष्ट्रीय मंच पर सम्मानित करने का अवसर प्रदान करेगा।

About प्रदीप रावत 'रवांल्टा'

Has more than 19 years of experience in journalism. Has served in institutions like Amar Ujala, Dainik Jagran. Articles keep getting published in various newspapers and magazines. received the Youth Icon National Award for creative journalism. Apart from this, also received many other honors. continuously working for the preservation and promotion of writing folk language in ranwayi (uttarakhand). Doordarshan News Ekansh has been working as Assistant Editor (Casual) in Dehradun for the last 8 years. also has frequent participation in interviews and poet conferences in Doordarshan's programs.

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