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राम मंदिर दान घोटाला: अब तक दर्ज नहीं हुई एफआईआर, जांच के घेरे में ट्रस्ट के कई पदाधिकारी

अयोध्या/लखनऊ। राम मंदिर में चढ़ावे की रकम और दान में मिले जेवरातों में कथित गड़बड़ी के मामले में जांच लगातार गहराती जा रही है। मामले के सामने आने के लगभग दो सप्ताह बाद भी एफआईआर दर्ज न होने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। पूर्व पुलिस अधिकारियों और कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि चोरी और गबन के प्राथमिक संकेत मिलने के बावजूद मुकदमा दर्ज न होना असामान्य स्थिति है।

जानकारी के अनुसार छह जून को दान राशि में अनियमितताओं का मामला उजागर हुआ था। आरोप है कि ट्रस्ट से जुड़े कुछ लोगों ने मामले को सार्वजनिक होने से रोकने के लिए संदिग्ध कर्मचारियों से पूछताछ की और उनकी निशानदेही पर रकम भी बरामद की गई। इसके बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया।

एसआईटी को मिले रिकॉर्ड में कई सवाल

एसआईटी ने चौथे दिन भी ट्रस्ट के पदाधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य संबंधित लोगों से पूछताछ जारी रखी। सूत्रों के अनुसार जांच में नकदी और जेवरात से जुड़े रिकॉर्ड में कई खामियां सामने आई हैं। दान में मिले सोने-चांदी और अन्य कीमती आभूषणों का पूरा हिसाब उपलब्ध नहीं कराया जा सका है, जिससे गबन की आशंकाएं और बढ़ गई हैं।

जांच टीम ने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी अनिल मिश्रा और अन्य जिम्मेदार पदाधिकारियों से पूछताछ की। बताया जा रहा है कि कई सवालों पर संतोषजनक जवाब नहीं मिल पाए हैं।

एफआईआर न होने पर उठ रहे सवाल

मामले में अब तक तीन शिकायतें और तहरीरें पुलिस को दी जा चुकी हैं, लेकिन मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है। कानून के जानकारों का कहना है कि यदि चोरी और धन की बरामदगी के तथ्य सामने आ चुके हैं, तो विधिक प्रक्रिया के तहत एफआईआर दर्ज होना चाहिए था। इससे जांच की पारदर्शिता पर भी सवाल उठ रहे हैं।

टिन्नू यादव और अन्य लोगों से दोबारा पूछताछ

एसआईटी ने चंपत राय के ड्राइवर टिन्नू यादव से दोबारा पूछताछ की। जांच एजेंसी यह जानने का प्रयास कर रही है कि दान राशि की गिनती और प्रबंधन की प्रक्रिया में उसकी क्या भूमिका थी। सूत्रों के अनुसार पूछताछ के दौरान कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों के नाम भी सामने आए हैं, जिनकी भूमिका की अब गहन जांच की जा रही है।

18 लोगों से पूछताछ

गुरुवार को एसआईटी ने करीब 18 लोगों से पूछताछ की। इनमें ट्रस्ट से जुड़े कर्मचारी, संदिग्ध व्यक्ति और कुछ ऐसे लोग भी शामिल रहे जिनकी मंदिर की व्यवस्थाओं में सक्रिय भूमिका बताई जा रही है।

जेवरातों को लेकर भी बढ़ी चिंता

जांच के दौरान कुछ श्रद्धालुओं की शिकायतें भी सामने आई हैं। कर्नाटक के एक श्रद्धालु ने दावा किया कि मंदिर में दान किए गए कीमती हार की उन्हें आज तक कोई रसीद नहीं मिली और उसके संबंध में कोई जानकारी भी उपलब्ध नहीं कराई गई। एसआईटी ऐसे मामलों की भी जांच कर रही है।

जांच पूरी होने के बाद दर्ज हो सकती है एफआईआर

सूत्रों के मुताबिक एसआईटी अपनी जांच पूरी करने के बाद विस्तृत रिपोर्ट शासन को सौंप सकती है। संभावना जताई जा रही है कि रिपोर्ट के आधार पर ही आगे एफआईआर दर्ज करने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई का निर्णय लिया जाएगा।

फिलहाल राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गबन का मामला प्रदेश की सबसे चर्चित जांचों में शामिल हो गया है और एसआईटी की अगली रिपोर्ट पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

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