दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास सत्य निकेतन की एक संकरी गली में रविवार दोपहर अचानक पांच मंजिला जर्जर इमारत भरभराकर गिर गई। करीब 30 साल पुरानी यह इमारत लड़कों के पेइंग गेस्ट (पीजी) के रूप में चल रही थी, जिसमें लगभग 150 लोगों की क्षमता बताई जा रही है। हादसे में अब तक छह लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि आठ लोग गंभीर रूप से घायल हैं। मलबे में और लोगों के फंसे होने की आशंका है।
इमारत ताश के पत्तों की तरह बिखर गई। घटनास्थल से पहला सीसीटीवी फुटेज भी सामने आ गया है, जिसमें हादसे की भयावहता साफ दिखती है। देशभर से दिल्ली यूनिवर्सिटी पढ़ने आए छात्र ज्यादातर सत्य निकेतन जैसी गलियों में ऐसे पीजी में रहते हैं। कई इमारतें बिना उचित अनुमति के खड़ी कर दी गई थीं और सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं था।
पुलिस के अनुसार, भूतल पर मरम्मत का काम चल रहा था, जिसके कारण इमारत ढह गई। साउथ कैंपस थाने में इमारत के मालिक हरिराम और अन्य लोगों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या, रखरखाव में लापरवाही और लोगों की सुरक्षा को खतरे में डालने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। आरोपियों की तलाश में कई टीमें लगाई गई हैं।
रेस्क्यू ऑपरेशन रविवार दोपहर से ही जारी है। एनडीआरएफ की दो टीमें 70 कर्मियों और डॉग स्क्वॉड के साथ मलबे में फंसे लोगों की तलाश कर रही हैं। स्थानीय लोगों ने भी हाथों और उपलब्ध औजारों से मदद की। मलबे के नीचे दबे कुछ छात्रों ने मोबाइल से मदद की गुहार लगाई। एनडीआरएफ अधिकारियों ने बताया कि फंसे लोगों को सांस लेने में सहायता के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर नीचे पहुंचाए गए हैं। दिल्ली पुलिस, अग्निशमन सेवा, जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, नगर निगम और नागरिक सुरक्षा की टीमें मौके पर तैनात हैं।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने हादसे की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं। इस घटना ने दिल्ली की कई पुरानी और अवैध पीजी इमारतों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कई परिवार अब भी अपने बच्चों से संपर्क न हो पाने की वजह से चिंतित हैं। हादसे के बाद प्रशासन ने आसपास की संदिग्ध इमारतों की जांच और कार्रवाई का भी संकेत दिया है।
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