नैनीताल। उत्तराखंड में प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया में हुई कथित अनियमितताओं के मामले पर नैनीताल हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने सुनवाई के बाद राज्य सरकार से अब तक दिए गए निर्णयों का अवलोकन करने को कहा है।
मामले में वर्ष 2016 की भर्ती प्रक्रिया को चुनौती दी गई है, जिसमें 11 योग्य अभ्यर्थियों को नियुक्ति से वंचित रखने और नियम विरुद्ध नियुक्तियों के आरोप लगाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि चयन प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुईं और योग्य अभ्यर्थियों को अवसर नहीं मिला।
कोर्ट ने पूर्व में दिए अपने आदेशों में कहा था कि नियम विरुद्ध नियुक्त शिक्षकों की सेवा प्रभावित किए बिना, 2025 की भर्ती प्रक्रिया में 11 रिक्त पदों को सुरक्षित रखा जाए ताकि पात्र अभ्यर्थियों को समायोजित किया जा सके।
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि सीबीएसई और एनसीटीई द्वारा अयोग्य बताए जाने के बावजूद चयन समिति ने नियुक्तियों की सिफारिश कैसे की। साथ ही विभाग द्वारा बार-बार पुराने फैसलों को सही ठहराने के प्रयासों पर भी नाराजगी जताई गई।
राज्य सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट के एक मामले का हवाला देते हुए याचिकाकर्ताओं को अपात्र बताया गया, जिसका याचिकाकर्ताओं ने विरोध किया। उनका कहना था कि उनकी पात्रता 2016 के विज्ञापन के अनुसार पहले से ही स्वीकार की जा चुकी है।
हाईकोर्ट ने संतुलित आदेश पारित करते हुए कहा कि मौजूदा नियुक्तियों पर असर डाले बिना याचिकाकर्ताओं को 11 सुरक्षित पदों पर समायोजित किया जाए। साथ ही सरकार को निर्देश दिया गया है कि वह इस मामले में उचित कानूनी समाधान निकाले और अब तक लिए गए निर्णयों की समीक्षा करे।
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