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चिपको आंदोलन की गुमनाम नायिका बचनी देवी का जाना…

  • महिपाल नेगी

चिपको आंदोलन की गुमनाम लेकिन बेहद साहसी नेत्री बचनी देवी का देहरादून में निधन हो गया। करीब 100 वर्ष की उम्र पार कर चुकी बचनी देवी ने 1970 के दशक में टिहरी गढ़वाल के नरेंद्रनगर ब्लॉक के आदवाणी गांव में हुए ऐतिहासिक चिपको आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

1 फरवरी 1978 को आदवाणी के जंगलों में जब 60-70 महिलाएं पेड़ों से चिपककर कटान का विरोध कर रही थीं, तब बचनी देवी उनमें प्रमुख रूप से शामिल थीं। उस समय जंगलों में 671 पेड़ों के कटान का खतरा था, लेकिन महिलाओं के इस आंदोलन के चलते सैकड़ों पेड़ बचाए जा सके।

बचनी देवी का संघर्ष केवल सरकार से ही नहीं, बल्कि अपने परिवार से भी रहा। उनके पति बख्तावर सिंह रावत जंगल ठेकेदार थे और उन्होंने आंदोलनकारियों को राशन देने से इनकार कर दिया था। इसके बावजूद बचनी देवी ने न सिर्फ अपना घर चलाया, बल्कि कई हफ्तों तक आंदोलनकारियों के लिए भी भोजन की व्यवस्था की।

इस कारण उन्हें परिवार से अलग होना पड़ा और उन्होंने पशुपालन कर आत्मनिर्भर जीवन जिया। चिपको आंदोलन के बाद भी बचनी देवी पर्यावरण संरक्षण के मुद्दों पर सक्रिय रहीं। वर्ष 2001 में आदवाणी क्षेत्र में पावर ग्रिड लाइन के लिए पेड़ों के कटान के विरोध में भी उन्होंने महिलाओं के साथ मिलकर आवाज उठाई।

पूरी तरह निरक्षर होने के बावजूद बचनी देवी पर्यावरण के महत्व को भली-भांति समझती थीं। उनका मानना था कि जंगलों का संरक्षण ही जीवन की आधारशिला है। उनके संघर्ष को बाद में कुछ सामाजिक संगठनों और लेखकों ने सामने लाया, लेकिन लंबे समय तक वे गुमनामी में ही रहीं। बचनी देवी का जीवन संघर्ष, साहस और पर्यावरण संरक्षण के प्रति समर्पण की प्रेरणादायक मिसाल है। उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा।

About प्रदीप रावत 'रवांल्टा'

Has more than 19 years of experience in journalism. Has served in institutions like Amar Ujala, Dainik Jagran. Articles keep getting published in various newspapers and magazines. received the Youth Icon National Award for creative journalism. Apart from this, also received many other honors. continuously working for the preservation and promotion of writing folk language in ranwayi (uttarakhand). Doordarshan News Ekansh has been working as Assistant Editor (Casual) in Dehradun for the last 8 years. also has frequent participation in interviews and poet conferences in Doordarshan's programs.

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