Friday , 4 April 2025
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अग्निवीर की वर्दी पहनने से पहले ओढ़ लिया कफन, तीन दोस्तों की मौत की दर्दनाक कहानी

देहरादून : मंगलवार रात राजधानी देहरादून की सड़कों पर एक दिल दहला देने वाला हादसा हुआ। एक बाइक डिवाइडर से टकरा गई, जिसमें सवार तीनों युवकों की दर्दनाक मौत हो गई। यह हादसा जितना भयावह था, उससे कहीं ज्यादा त्रासदी भरी इसकी कहानी है—क्योंकि मृतकों में दो युवा हाल ही में अग्निवीर भर्ती हुए थे और आज लैंसडाउन में ट्रेनिंग के लिए उन्हें पहुंचना था। लेकिन, उनके कदम वहां नहीं पहुंचे, बल्कि उनके पार्थिव शरीर घरवालों के आंगन में पहुंच गए।

सपनों की उड़ान से पहले ही उजड़ गए घर

मृतकों की पहचान उत्तरकाशी के पुरोला के आदित्य रावत (21), नौगांव के नवीन (20) और पुरोला के मोहित रावत (21) के रूप में हुई है। मोहित और आदित्य को भारतीय सेना में अग्निवीर के रूप में चुना गया था। उनके माता-पिता, रिश्तेदार और पूरा गांव गर्व से भरा हुआ था कि उनके लाल देश की सेवा करने जा रहे हैं। लेकिन किसे पता था कि वर्दी पहनने से पहले ही कफ़न ओढ़ना पड़ेगा। नवीन भी अपने दोस्तों की तरह फौजी बनने का सपना देख रहा था। वह भर्ती की तैयारी कर रहा था और जल्द ही सेना में जाने की उम्मीद लगाए बैठा था। लेकिन नियति ने उसके लिए कुछ और ही लिखा था।

हंसी-खुशी से भरी रात, जो आखिरी बन गई

मंगलवार रात करीब 2:15 बजे, तीनों दोस्त बाइक पर राजपुर से घंटाघर की ओर जा रहे थे। उनके मन में सेना की ट्रेनिंग और आने वाले सुनहरे भविष्य की तस्वीरें चल रही थीं। लेकिन कुछ ही पलों में सब बदल गया। राजपुर रोड के पास सिल्वर सिटी के पास उनकी बाइक तेज रफ्तार में डिवाइडर से टकरा गई।

तीन बार मौत ने दस्तक दी

हादसे के तुरंत बाद तीनों को गंभीर हालत में दून अस्पताल ले जाया गया। हादसे कुछ ही देर बाद मोहित ने दम तोड़ दिया। बुधवार दोपहर आदित्य भी दुनिया छोड़ गया। शाम होते-होते नवीन भी जिंदगी की जंग हार गया। तीनों की मौत की खबर जब उनके गांव पहुंची तो कोहराम मच गया। जो लोग बेटे की वर्दी में तस्वीर देखने का इंतजार कर रहे थे, अब उनकी अर्थी को कंधा देने की तैयारी कर रहे थे।

घरवालों का रो-रोकर बुरा हाल

आदित्य और मोहित, जो देहरादून के करणपुर में रहते थे, आज वहां उनके कमरों में केवल उनकी यादें बची हैं। उनके बैग तैयार थे, ट्रेनिंग की तैयारी पूरी थी, लेकिन वे खुद नहीं रहे। नवीन, जो सहस्त्रधारा रोड पर रहता था, उसके माता-पिता अब भी यकीन नहीं कर पा रहे कि उनका लाल कभी घर लौटकर नहीं आएगा। तीनों परिवारों का बुरा हाल है। मांओं की आंखों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे। बाप के मजबूत कंधे जो बेटे को सलामी देने के लिए तैयार थे, अब उन्हीं कंधों पर बेटे की अर्थी उठानी पड़ रही है।

तीन परिवारों के सपनों का बिखर जाना

यह सिर्फ एक सड़क हादसा नहीं था, यह तीन परिवारों के सपनों का बिखर जाना था। यह उन युवाओं की अधूरी कहानियां थीं, जिनका भविष्य उज्ज्वल था, लेकिन किस्मत ने उनकी किताब का आखिरी पन्ना जल्दी ही लिख दिया। आज, जब लैंसडौन में अग्निवीरों की ट्रेनिंग शुरू हो रही होगी, वहां से दो नाम कम होंगे। उनकी कुर्सियां हमेशा खाली रहेंगी, क्योंकि आदित्य और मोहित अब इस दुनिया में नहीं हैं।

About प्रदीप रावत 'रवांल्टा'

Has more than 19 years of experience in journalism. Has served in institutions like Amar Ujala, Dainik Jagran. Articles keep getting published in various newspapers and magazines. received the Youth Icon National Award for creative journalism. Apart from this, also received many other honors. continuously working for the preservation and promotion of writing folk language in ranwayi (uttarakhand). Doordarshan News Ekansh has been working as Assistant Editor (Casual) in Dehradun for the last 8 years. also has frequent participation in interviews and poet conferences in Doordarshan's programs.
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